BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 08 जुलाई, 2007 को 15:46 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
परिवार ने कहा निर्दोष हैं डॉक्टर हनीफ़

डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़
डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ को हिरासत में लिया गया है
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में हुए विफल हमलों के सिलसिले में हिरासत में लिए गए भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ के परिवार का कहना है कि वो निर्दोष हैं और उनका किसी ‘आतंकवादी घटना’ से कोई संबंध नहीं है.

डॉक्टर हनीफ़ को ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.

हनीफ़ के परिवार ने आशा व्यक्त की है कि हनीफ़ को ज़ल्द ही छोड़ दिया जाएगा.

बंगलौर के फ़्रेज़र टाउन के एक कॉम्प्लेक्स में डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ के घर की खामोशी एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज़ों से ही टूटती है और बाकी सब लोग अपनी-अपनी जगह बिल्कुल ख़ामोश हैं.

यहाँ तक कि घर पर दी जाने वाली किसी दस्तक का भी कोई जबाव नहीं मिलता.

जबसे ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने मोहम्मद हनीफ़ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है उसी दिन से इस घर का यही हाल है.

तभी से यह परिवार हनीफ़ से सपंर्क करने की लगातार कोशिश कर रहा है. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही है. इससे परिवार की चिंता और भी बढ़ती जा रही है.

 दस दिन पहले ही मेरे भाई की बेटी का जन्म हुआ था. बेटी की तबियत ठीक नहीं थी और भाई उसी को देखने के लिए छुट्टी लेकर आ रहें थे. तभी उन्हें ब्रिस्बेन एयरपोर्ट पर पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया. मंगलवार की सुबह जब टीवी देखा तो यह सारी बात मालूम हुई
सुमैया

डॉक्टर हनीफ़ की छोटी बहन सुमैया जो बायोतकनीक में स्नातकोत्तर हैं अपनी विपदा सुनाते हुए कहती हैं, “ दस दिन पहले ही मेरे भाई की बेटी का जन्म हुआ था. बेटी की तबियत ठीक नहीं थी और भाई उसी को देखने के लिए छुट्टी लेकर आ रहें थे. तभी उन्हें ब्रिस्बेन एयरपोर्ट पर पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया. मंगलवार की सुबह जब टीवी देखा तो यह सारी बात मालूम हुई.”

सुमैया कहती हैं कि उनके पिता का देहांत हो जाने के बाद हनीफ़ उनके लिए पिता के समान हैं.

परिवार परेशान

दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने औपचारिक रुप से अभी तक यह नहीं बताया है कि हनीफ़ को किस लिए हिरासत में लिया गया है. लेकिन माना यह जा रहा है कि हनीफ़ के मोबाइल फ़ोन का सिम कार्ड डॉक्टर सबील के पास से मिलना ही इसका सबसे बड़ा कारण है.

इस बारें में सुमैया का कहना हैं, “हमें मीडिया के ज़रिए मालूम हुआ कि हनीफ़ ने अपने मोबाइल का सिम किसी को दे दिया था.”

वहीं स्थानीय मीडिया ने जिस तरह से हनीफ़ को अभी से दोषी और ‘आतंकवादी’ बताना शुरु कर दिया है, इससे यह परिवार और भी ज़्यादा दुखी हो गया है और अब वो किसी भी मीडिया वाले से बात नहीं करना चाहता.

उधर सुमैया ने ऑस्ट्रेलिया की सरकार से अपील की है कि वो कम से कम एक बार हनीफ़ से फ़ोन पर बात करने का अवसर दे.

वे कहती हैं, “हमें कुछ नहीं मालूम कि यह सब क्या हो रहा है. मैं ऑस्ट्रेलिया की सरकार से निवेदन करती हूँ कि वो एक बार मेरी हनीफ़ से बात करा दे. हम लोग बहुत बैचेन हैं. हमें कुछ नहीं मालूम कि वो किस हाल में है.”

हनीफ़ के परिवार का ग़म इस बात से और भी बढ़ गया है कि उनके रिश्तेदार डॉक्टर मक़बूल अहमद और डॉक्टर ज़किया दोनों ही अपने बेटों शफ़ील और कफ़ील के लिए रो रहे हैं.

डॉक्टर मक़बूल के परिवार के वकील जावेद अहमद ने इस बात का खंडन किया है कि डॉक्टर मक़बूल ने कफ़ील अहमद के दोषी होने की बात स्वीकार कर ली है.

जावेद ने कहा कि मक़बूल अलज़ाइमर के मरीज़ हैं और वो बात भी नहीं कर सकते.

इससे जुड़ी ख़बरें
मनमोहन का गॉर्डन ब्राउन को आश्वासन
05 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस
हमले के आत्मघाती होने के संकेत
01 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना
लंदन में एक और बम बरामद
29 जून, 2007 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>