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'हनीफ़ को समुचित सुविधाएँ दी जाएँ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्ट्रेलिया में डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ की हिरासत पर उठते सवालों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार को हनीफ के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए. उधर हनीफ़ ने अपना वीज़ा निरस्त करने के ऑस्ट्रेलिया सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील भी की है. हनीफ़ के वकील पीटर रुसो ने इस संबंध में और जानकारी देने से इनकार किया है और कहा है कि मामले पर सुनवाई में एक महीने से अधिक का समय लग सकता है. हनीफ़ पर ब्रिटेन में असफल चरमपंथी धमाकों के संदिग्ध अभियुक्तों के साथ संबंध रखने का आरोप है. दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन समारोह के बाद प्रधानमंत्री ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया को क़ानून के तहत हनीफ़ के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें वो सुविधाएं देनी चाहिए जिसके वो हकदार हैं." ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने हनीफ़ पर 'ग़ैर-इरादतन' आतंकवादी संगठन की मदद करने का आरोप लगाया है. पेशे से डॉक्टर हनीफ़ पर आरोप है कि उन्होंने अपने संबंधी सबील अहमद को अपना मोबाइल सिम कार्ड दिया. सबील कथित रुप से ब्रिटेन के ग्लासगो एयरपोर्ट पर हुए हमले में शामिल बताया जाता है. हालांकि हनीफ़ को इस मामले में ज़मानत मिल गई थी लेकिन इसके तुरंत बाद ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री केविन एंड्र्यूस ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए हनीफ़ का वीज़ा निरस्त कर दिया और उन्हें आव्रजन क़ानून के तहत हिरासत में ले लिया गया. | इससे जुड़ी ख़बरें संदिग्ध लोगों का संबंध स्वास्थ्य सेवा से03 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना लंदन धमाके में एक भारतीय गिरफ़्तार03 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना संदिग्ध लोगों में दो भारतीय डॉक्टर03 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना हनीफ़ को हिरासत में रखे जाने का फ़ैसला16 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना डॉक्टर हनीफ़ की हिरासत की अवधि बढ़ी09 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना हनीफ़ पर आरोप तय, अदालत में पेशी13 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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