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शंभू की जान फिर ख़तरे में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के वेल्स में एक मंदिर में रहने वाले शंभू नाम के बैल को मारने पर अदालत ने रोक लगा दी थी लेकिन अब एक ऊपरी अदालत ने इस रोक को रद्द कर दिया है. इस नए निर्णय का अर्थ है कि अदालत ने शंभू को मारने के आदेश को सही ठहरा दिया है. शंभू टीबी से पीड़ित है और अधिकारियों का कहना है कि अगर उसे नहीं मारा गया तो बीमारी अन्य मवेशियों और यहाँ तक कि इंसानों में भी फैल सकती है. वेल्स हाईकोर्ट ने यह कहते हुए शंभू को मारने पर रोक लगा दी थी कि ऐसा करने से लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी और यह अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार का मामला है. पिछले सोमवार को हाईकोर्ट का फ़ैसला आया था जिसका कई हिंदू और बौद्ध संगठनों ने स्वागत किया था जबकि स्थानीय किसानों का कहना था कि शंभू को छोड़ना एक ख़तरनाक निर्णय है. सोमवार को आए वेल्स हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद वेल्स एसेंबली ने इसके ख़िलाफ़ अपील की थी, कोर्ट ऑफ़ अपील ने पिछले फ़ैसले को रद्द करते हुए शंभू को मारे जाने के निर्णय को सही ठहराया है. जज गैरी हिकिनबॉटम ने अपने आदेश में कहा था कि शंभू को मारना ग़ैर-क़ानूनी होगा, उन्होंने अपने फ़ैसले में कहा था कि शंभू को मारने का निर्णय लेते समय मंदिर से जुड़े लोगों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा गया है. छह वर्ष के बैल शंभू को मारने का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है, इंटरनेट पर हज़ारों से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लेकर शंभू को बचाने की गुहार लगाई है. | इससे जुड़ी ख़बरें शंभू को बचाने की मुहिम जारी22 मई, 2007 | पहला पन्ना शंभू को न मारने की अपील नामंज़ूर27 जून, 2007 | पहला पन्ना शंभू को मारने के फ़ैसले पर रोक लगी16 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना शंभू की जान फिर ख़तरे में23 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना जेल की बैरकों में पल रही है गायें22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस गो हत्या के लिए 12 साल की सज़ा03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नाइजीरिया में पशुओं को पकड़ा जाएगा29 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना आवारा गाय के साथ लगेगी माइक्रोचिप11 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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