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शंभू को मारने के फ़ैसले पर रोक लगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक हिंदू मंदिर में रहने वाले बैल शंभू को मार डालने के सरकारी आदेश को वेल्स की हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. कुछ महीने पहले स्वास्थ्य जाँच के दौरान पाया गया था कि शंभू टीबी ग्रस्त है जिसके बाद वेल्स सरकार ने संक्रमण को रोकने के लिए उसे मार देने का आदेश दिया था. मंदिर के पुजारियों ने सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अदालत में अपील की थी. मंदिर के वकीलों की दलील थी कि यह मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है जबकि सरकार का कहना था कि बीमारी को फैलने से रोकना ज़रूरी है. वेल्स सरकार ने कहा है कि वे फ़ैसले का अध्ययन करने के बाद इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे. मंदिर के वकील ने दलील दी थी कि शंभू से धार्मिक भावनाएँ जुड़ी हैं इसलिए उस पर सामान्य पालतू जानवरों के लिए बनाए गए नियम लागू नहीं किए जाने चाहिए. मंदिर के वकील का कहना था कि अगर शंभू को मार डाला गया तो स्कंदवेल मंदिर से जुड़े हिंदुओं और बौद्धों की धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी. सरकारी वकील का कहना था कि टीबी एक संक्रामक रोग है और शंभू से यह बीमारी वेल्स के मवेशियों, यहाँ तक कि इंसानों में भी फैल सकती है इसलिए उसे मारे जाने का फ़ैसला सही है. वेल्स के किसानों ने अदालत के इस फ़ैसले का विरोध करते हुए कहा है कि इससे रोग निरोधक कार्यक्रम को धक्का पहुँचा है. सरकारी वकील का कहना था कि फ़ैसला बहुत गंभीर विचार-विमर्श के बाद किया गया था. छह वर्ष के बैल शंभू को मारने का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था, इंटरनेट पर 20 हज़ार से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लेकर शंभू को बचाने की गुहार लगाई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें जेल की बैरकों में पल रही है गायें22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस गो हत्या के लिए 12 साल की सज़ा03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नाइजीरिया में पशुओं को पकड़ा जाएगा29 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना आवारा गाय के साथ लगेगी माइक्रोचिप11 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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