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जेल की बैरकों में पल रही है गायें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सेंट्रल जेल के अंदर बंदियों और क़ैदियों के लिए बनाए गए बैरकों में हर रोज़ एक दिलचस्प दृश्य दिखाई देता है. सुबह-सुबह किसी बैरक का दरवाज़ा खोलते हुए जब कोई नंबरदार किसी को बाहर आने के लिए कहे तो आप ये मत सोचिएगा कि अब कोई क़ैदी या बंदी बाहर आएगा. 'नंबर-13' की पुकार पर हो सकता है, रंभाने की कोई आवाज़ आए और आपके सामने कोई गाय खड़ी हो जाए. रायपुर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, कोरबा और अंबिकापुर की जेलों के भीतर भी अब ऐसे दृश्य आम हो चले हैं. छत्तीसगढ़ में सरकार बनाते समय भाजपा ने एक लाख आदिवासियों को गाय बांटने की घोषणा की थी लेकिन यह योजना बुरी तरह फ्लॉप हो गई. अब 3 साल बाद सरकार ने राज्य की जेलों में गौशाला खोल कर गौ-सेवा का अपना एजेंडा पूरा करना शुरु किया है. गाय नंबर एक दिलचस्प ये है कि इन गायों को भी क़ैदियों की तरह रखा गया है-यानी बैरकों में. इतना ही नहीं, राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल में फिलहाल 24 गाय और 22 बछड़े हैं और इन सबको काली, भूरी या श्यामा जैसे नामों के बजाय क़ैदियों की तरह नंबर दिए गए हैं. इनके गले में बक़ायदा इन नंबरों के पट्टे भी लगाए गए हैं. सुबह इन गायों के बैरक खोले जाते हैं और दूध निकालने, खिलाने-पिलाने और साफ-सफाई के बाद ठीक दोपहर बारह बजे इन्हें फिर से बैरक में बांध दिया जाता है. फिर दोपहर ढाई बजे इन्हें बैरक से बाहर निकाला जाता है. इसके बाद शाम 5 बजे क़ैदियों की गिनती के साथ-साथ इनकी भी गिनती होती है और इन्हें फिर से बैरक में बंद कर दिया जाता है. इन गायों की देखभाल का जिम्मा क़ैदियों पर है और इसके लिए गौशाला समिति भी बनाई गई है. रायपुर में जेल के अधिकारी ख़ुश हैं कि गायों के कारण जेल में शुद्ध दूध मिलना शुरु हो गया है. चक्कर चारा का लेकिन राज्य की दूसरी जेलों में इन गायों के कारण जेल के अधिकारी परेशान हैं.
कोरबा जेल में इसी महीने शुरु हुई गौशाला की पाँच गायों के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है. जेल में गौशाला तो खोल दिया गया, लेकिन इन गायों और बछड़ों के चारे के लिए जेल की बजट में कोई प्रावधान ही नहीं है. हाल ये है कि जेल के अधिकारी अपनी जेब से चारे की व्यवस्था कर रहे हैं. कम चारा और बदली हुई जलवायु के कारण गायों की हालत खराब है और गायों ने दूध देना कम कर दिया है. जेल के एक अधिकारी कहते हैं- “चारा के चक्कर में हम सब परेशान हैं. गौशाला समिति ने आर्थिक मदद के नाम पर हाथ खड़े कर दिए हैं.” बिलासपुर के जेल अधीक्षक को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में गायों की देखभाल को लेकर राज्य सरकार कोई ठोस क़दम उठाएगी. दो दशक पहले भी रायपुर जेल में गौशाला खोली गई थी लेकिन देखभाल के अभाव में गायों की मौत होने लगी और गौशाला बंद हो गई. इस बार राज्य की सभी जेलों में गौशाला खोलने की योजना है, ये और बात है कि गायों की देखभाल और उनके चारे की व्यवस्था को लेकर अभी तक कोई कार्य व्यवस्था नहीं बनाई गई है. हालांकि राज्य के गृहमंत्री रामविचार नेताम जेल की गौशाला को लेकर परेशान नहीं है. वे कहते हैं- “अभी तो यह प्रयोग के बतौर किया गया है. जेल मैनुअल में भी हम इसे शामिल करेंगे और गायों के लिए सुविधाएं भी जुटाएँगे. जेल में गौशाला से क़ैदियों में गाय के प्रति सेवा की भावना आ रही है और उन्हें शुद्ध दूध भी मिल रहा है.” ज़ाहिर है, गृहमंत्री की प्राथमिकता में फ़िलहाल गाय नहीं है. यानी वे अभी दूध और दूध की धार देख रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें गो हत्या के लिए 12 साल की सज़ा03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस मध्य प्रदेश की गायें, राजस्थान के साँड़09 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस आवारा गाय के साथ लगेगी माइक्रोचिप11 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस आवारा पशु पकड़ें, दो हज़ार रुपए पाएँ05 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस हीरे चर गई गाय, तलाशी गोबर की20 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस अब गाय-बकरियों पर भी टैक्स15 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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