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अब गाय-बकरियों पर भी टैक्स
पश्चिम बंगाल में रहने वालों को अब गाय, भैंस और बकरियों पर भी टैक्स देना होगा. ये जानवर अब सरकारी ज़मीन पर मुफ़्त चारा भी नहीं चर सकेंगे. पिछले दो सालों से आर्थिक तंगी से जूझ रही राज्य सरकार ने इन जानवरों और बैलगाड़ी तक पर टैक्स लगाने का फ़ैसला किया है. विपक्षी राजनीतिक दलों तृणमूल काँग्रेस और काँग्रेस ने सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ दिया है. केंद्रीय मंत्री और तृणमूल काँग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने इस टैक्स के ख़िलाफ़ तीन फ़रवरी को बंद करने का फ़ैसला किया है. राज्य के पंचायत मंत्रालय ने पिछले दिनों पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे गाँवों में सभी पालतू जानवरों पर टैक्स वसूलें ताकि उसे राजस्व मिल सके. सरकार के दिशा निर्देशों में कहा गया है कि लोगों को अब अपने साइकिल, रिक्शा और बैलगाड़ी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. अब सरकारी ज़मीन पर जानवर चराने के लिए भी गाँव के लोगों को टैक्स देना होगा. राजस्व बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर हर साल सरकार को ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च करना पड़ता है. उनका कहना था कि सरकार अब यह खर्च नहीं उठा सकती.
उनका तर्क है कि कर्नाटक, केरल और पंजाब में पंचायतों की प्रति व्यक्ति आय 50 रुपए है जबकि पश्चिम बंगाल में यह सिर्फ़ दो रुपए प्रति व्यक्ति ही है. सरकार के इस फ़ैसले ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्ष को एक राजनीतिक मुद्दा दे दिया है. दूसरी ओर सरकार अपने इस फ़ैसले के बचाव में जुट गई है. मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का कहना है कि सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए पंचायतों को कुछ सुझाव भेजे हैं और इस पर अमल करने न करने का फ़ैसला पंचायतों को ही लेना है. उनका कहना है कि पंचायत अधिनियम कांग्रेस ने 1973 में बनाए थे और उसमें टैक्स वसूल करने का प्रावधान है. वैसे इस टैक्स पर वाममोर्चा में शामिल कई दलों ने भी सवाल उठाए हैं. सरकार ने कहा है कि वह ग़रीबों को इस टैक्स के दायरे से बाहर रखने पर विचार कर सकती है. |
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