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हीरे चर गई गाय, तलाशी गोबर की
गाय और गोबर- भारत की ज़िंदगी में रचे बसे हैं. भारत में गाय की भी महिमा है और गोबर की भी, कारण चाहे धार्मिक हो या आर्थिक. मगर गुजरात के लिंबुडी शहर का एक मामला सीधा-सीधा आर्थिक पक्ष से जुड़ा है. यहाँ रहनेवाले जौहरी मोहब्बत सिंह गोहिल इन दिनों एक गाय के गोबर की दिन-रात निगरानी कर रहे हैं, और वो भी बड़ी बारीकी से. दरअसल ये गाय उनके हीरे 'चर' गई है और अब वे इस उम्मीद में पलकें बिछाए गोबर की छान-बीन कर रहे हैं कि कब उन्हें उनके खोए हीरे उन्हें वापस मिल जाएँ. हीरे गाय के पेट में
हुआ ये कि इस महीने के शुरू में गोहिल जी एक शाम अपना काम ख़त्म कर जब घर लौटे तो उन्होंने पाया कि उनके हीरे ग़ायब हैं. उन्होंने अपने दिमाग़ पर ज़ोर डाला और ये हिसाब निकाला कि उनके 40 हज़ार रूपए के हीरे एक ऐसी जगह गिर गए जहाँ कुछ गाएँ यूँ ही टहलक़दमी कर रही थीं. उन्हें शक हुआ कि हो-ना-हो उनके हीरे इन्हीं में से किसी गाय के पेट की भेंट चढ़ गए. गोहिल जी का शक और पक्का हो गया जब वे उस जगह गए जहाँ गाएँ थीं. उन्होंने देखा कि वहाँ एक गाय उस पैकेट को ताबड़तोड़ चबाए जा रही है जिसमें उन्होंने खाना रखा था और जो पैकेट उन हीरों के साथ ही था. बस उन्होंने ना आव देखा ना ताव, उस गाय को पकड़कर 'नज़रबंद' कर दिया. गोबर की निगरानी संदिग्ध गाय को जमकर चारा खिलाया गया और फिर तबसे उसके गोबर की निगरानी जारी है. गोहिल जी और उनके सहयोगियों की तब साँस में साँस आई जब उन्हें गोबर में हीरों के कुछ टुकड़े नज़र आए. गोहिल जी ने कहा,"मैंने गाय के मालिक से इस विशेष जाँच की अनुमति ले ली है और मैं इस बात पर नज़र रख रहा हूँ कि गाय के साथ कोई बदसलूकी ना हो". फिलहाल मोहब्बत सिंह गोहिल 'हीरे देनेवाली गौमाता' के गोबर की निगरानी में जुटे हैं. उनका कहना है कि सारे के सारे हीरे आने में महीने भर का समय लग जाएगा. |
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