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मध्य प्रदेश की गायें, राजस्थान के साँड़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य प्रदेश की गायों का सेवाभार अब राजस्थान के साँड़ों के कंधे पर होगा. आला 'गिर' नस्ल के 22 हज़ार राजस्थानी साँड़ गोसेवा हेतु जल्द ही मध्यप्रदेश लाए जाएँगे. यहाँ आगमन के बाद उन्हें राज्य के गाँवों में छोड़ा जाएगा ताकि मध्यप्रदेश के गायों की नस्ल में सुधार हो सके. मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने हाल ही में घोषणा की है कि राज्य के इन चुनिंदा गाँवों में ग़रीबी रेखा से नीचे रहनेवाले तीन परिवारों को एक-एक गाय मुफ़्त दी जाएगी. भारतीय जनता पार्टी शासित मध्य प्रदेश गायों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव मानता है और इस माध्यम से गाँवों के माली सुधार के लिए एक बड़ी योजना राज्य सरकार ने तैयार की है. पशुपालन एवं गोसंवर्धन बोर्ड मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज़ादी के बाद के दशकों में गायों की नस्ल सुधार पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है. एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार गौवंश एवं पशुपालन की महत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से एक मंत्री और एक अधिकारिक दल ने पिछले तीन महीने के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तरप्रदेश का दौरा कर गायों की नस्लों और गौशालाओं का जायजा लिया. दल ने तीन राज्यों में मौजूद नस्लों में राजस्थान के साँड़ों को प्राथमिकता दी. साथ ही यह दल अजमेर, जयपुर, चित्तौड़गढ़ और टौंक ज़िलों में अपनाई गई पशुपालन व्यवस्था को मध्यप्रदेश में भी लागू करना चाहता है. एक सरकारी अधिकारी के अनुसार साँड़ों के मामले में उन्हें राजस्थान से मध्यप्रदेश लाने की व्यवस्था और रूपए-पैसों के लेन-देन इत्यादि पर फिलहाल चर्चा होनी है. लेकिन मध्यप्रदेश ने पड़ोसी राज्य से आग्रह किया है कि मध्यप्रदेश की गाएँ चूंकि काफ़ी कमज़ोर हैं इसीलिए अच्छी नस्ल के साँड़ तो हों पर एकदम से मुस्टंडे साँड़ों को न भेजा जाए. |
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