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शंभू को बचाने की मुहिम जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में इन दिनों शंभू नाम का एक बैल सुर्ख़ियों में छाया हुआ है. सरकार का कहना है कि शंभू को टीबी है इसीलिए नियम के मुताबिक उसे मार डाला जाना चाहिए. लेकिन कुछ हिंदू संगठनों, शाकाहारियों और पशु प्रेमियों ने इस मुद्दे पर सरकार से कड़ा विरोध जताते हुए फ़ैसला बदलने के लिए दबाव बना रखा है. इस बीच, शंभू दक्षिण पश्चिमी वेल्स के एक मंदिर में है जिसका नाम है स्कंद वेल मंदिर. शहर से दूर, इस हरे-भरे इलाक़े में ये मंदिर आसपास के पत्थर काटकर बनाया गया है. स्कंद वेल मंदिर में विष्णु भगवान और काली माता की सुंदर प्रतिमाएँ हैं. दक्षिण भारतीय परंपरा का ये मंदिर किसी आश्रम से कम नहीं है. यहाँ दो सौ पशु हैं जिनमें गाय, हिरण, मोर और एक हाथी शामिल है और इन्हीं के बीच है शंभू. जानवरों के परीक्षण के दौरान पाया गया कि शंभू को शायद टीबी है. माना जाता है कि ये बीमारी पशुओं से दूसरे पशुओं ही नहीं मानवों में भी फैल सकती है. विरोध हिंदू संगठन इसके सख़्त ख़िलाफ़ हैं कि शंभू को मार डाला जाए. हिंदू फ़ोरम ऑफ़ ब्रिटेन के रमेश कालीदाई कहते हैं कि ऐसा करना हिंदू धर्म की परंपराओं के ख़िलाफ़ है. इस साल वेल्स में ऐसे 5200 पशुओं को मारा जा चुका है जिन्हें शंभू जैसी बीमारी थी. ऐसे में किसान संगठनों की दलील है कि शंभू को भी मार डाला जाना चाहिए. ब्रिटेन के किसान संगठन नेशनल फ़ार्मर्स यूनियन के एड रीस कहते हैं, “शंभू को मारना ही होगा, इसका और कोई विकल्प नहीं है. एक देश में अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग क़ानून नहीं हो सकते.” लेकिन इस बीच मंदिर में सैकड़ों लोग शंभू को देखने पहुँच रहे हैं. मंदिर में आप मुफ़्त रह सकते हैं और मंदिर बहुत ही ख़ूबसूरत इलाक़े में है. इस मंदिर में आईं एक स्विस महिला कहती हैं, “मुझे लगता है कि जीवन सर्वोपरि है. इस पर हिंदुओं ही क्यों सबको एकमत होना चाहिए, जब आप किसी को ज़िंदगी दे नहीं सकते तो आप उसकी जान ले कैसे सकते हैं.” दिलचस्प बात ये है कि स्कंद वेल मंदिर में एक जगह एक ईसाई क्रॉस भी रखा है और बौद्ध धर्म से जुड़े प्रतीक भी. बौद्ध भी बौद्ध धर्म मानने वाले एक व्यक्ति ने कहा, “मैं बौद्ध हूँ लेकिन फिर भी मुझे ये लगता है कि शंभू एक मंदिर में है. शंभू अगर किसी खेत में होता तो अलग बात थी लेकिन इस जगह कई धर्मों से जुड़े लोग आते हैं. मुझे लगता है यहाँ शंभू को मारना नहीं चाहिए.” मज़े की बात ये है कि शंभू के लिए स्कंदवेल मंदिर ने एक वेबसाइट खोली है जिस पर दस हज़ार से ज्यादा लोगों ने उसे मारे जाने का विरोध किया है. साथ ही स्कंद वेल मंदिर की वेबसाइट पर एक वेबकैम भी लगा है जिसके ज़रिए शंभू चौबीसों घंटे कंप्यूटर पर देखा जा सकता है. स्कंद वेल मंदिर के कई हिंदू संन्यासियों और संन्यासिनों में बेहद नाराज़गी है. ब्रिटेन के ब्रदर एलेक्स कहते हैं, “हम विरोध करने के लिए हिंसा का रास्ता नहीं अपनाएँगे. लेकिन हम कहीं बड़ी गाड़ी खड़ी कर सकते हैं जो ख़राब हो सकती है. अगर सरकार शंभू को मारना चाहती है तो उसे मंदिर तोड़कर अंदर आना पड़ेगा जो दुनिया भर के लोग देखेंगे – ये सरकार के लिए कोई अच्छा प्रचार तो नहीं होगा.” लोगों की भावनाओं को देखते हुए वेल्स एसेंबली ने शंभू को मारने की तारीख़ आगे बढ़ा दी है लेकिन उसके सिर पर तलवार अब भी लटक रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें जेल की बैरकों में पल रही है गायें22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस गो हत्या के लिए 12 साल की सज़ा03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नाइजीरिया में पशुओं को पकड़ा जाएगा29 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना आवारा गाय के साथ लगेगी माइक्रोचिप11 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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