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शंभू को न मारने की अपील नामंज़ूर
शंभू
शंभू टीबी से पीड़ित है
ब्रिटेन में टीबी से पीड़ित शंभू नाम के एक बैल को न मारने की अपील वेल्स के स्वास्थ्य अधिकारियों ने ठुकरा दी है.

दरअसल शंभू को सरकारी नियमों के तहत मारे जाने को लेकर विवाद चल रहा था.

27 अप्रैल को हुए एक परीक्षण में छह वर्षीय शंभू को टीबी से पीड़ित पाया गया था.

स्थानीय स्कंद वेल मंदिर से जुड़े हिंदू लोग और भिक्षु शंभू को मारे जाने का विरोध कर रहे थे. इस मंदिर से हिंदुओं समेत कई धर्मों के लोग जुड़े हुए हैं.

लेकिन अब वेल्श एसेंबली में ग्रामीण मामलों की मंत्री जेन डेविडसन ने कहा है कि हालांकि वे समझती हैं कि इस क़दम से लोगों को दुख पहुँचेगा लेकिन बीमार बैल के मामले में स्वास्थ्य नीति अपनानी ही पड़ेगी.

 हमने एक महीने तक जाँच की है, सब लोगों की बात सुनी है लेकिन टीबी से पीड़ित इस बैल को मारना ज़रूरी है
जेन डेविडसन

जेन डेविडसन ने कहा, "हमने एक महीने तक जाँच की है, सब लोगों की बात सुनी है लेकिन टीबी से पीड़ित इस बैल को मारना ज़रूरी है."

स्कंद वेल से जुड़े ब्रदर एलेक्स ने कहा है कि वे फ़ैसले को लेकर काफ़ी निराश हैं.

उन्होंने कहा," ये जानवरों की भलाई या मानव स्वास्थ्य का मामला नहीं है. ये पैसे और राजनीति का मामला है."

बचाने की कोशिश

 ये जानवरों की भलाई या मानव स्वास्थ्य का मामला नहीं है. ये पैसे और राजनीति का मामला है
ब्रदर एलेक्स

उधर ब्रिटेन में द हिंदू काउंसिल ने कहा, "हमें ख़ेद है कि शंभू को मारने का फ़ैसला लिया गया है. लेकिन हम मंत्री के इस बयान को समझते हैं कि शंभू की हालत दूसरे पशुओं के लिए खतरा बन सकती है."

भिक्षुओं को इस हफ़्ते के अंत तक का समय दिया गया है कि वे शंभू को न मारे जाने को लेकर अंतिम अपील कर सकें.

इन लोगों ने कहा है कि बैल को मारने से रोकने के लिए वे मानव श्रृंखला बनाएँगे. भिक्षुओं का कहना है कि बैल को मारना उनकी धार्मिक भावनाओं के ख़िलाफ़ होगा.

उधर वेल्श किसान यूनियन के नेताओं ने बैल को मारने के फ़ैसले का स्वागत किया है. नेताओं का कहना है कि ये फ़ैसला चिकित्सक और क़ानूनी सलाह के आधार पर लिया गया है.

अप्रैल महीने से ही इस मामले को लेकर हिंदू समुदाय के लोग और कई भिक्षु मुहिम चलाए हुए हैं.

इन लोगों का कहना है कि उनके डॉक्टर की रिपॉर्ट के मुताबिक शंभू का स्वास्थ्य ठीक है और बैल को बाकी जानवरों से अलग रखा गया है ताकि कोई संक्रमण न हो.

शंभू को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अभियान चलाया गया है. इसमें मू ट्यूब नाम से एक वेबसाइट शुरू की गई और उसमें वेबकैम भी लगाया गया है. वेब कैमरे के ज़रिए लोग शंभू को देख सकते हैं.

मंगलवार दोपहर तक शंभू को बचाने के लिए लगाई गई ऑनलाइन याचिका पर 17 हज़ार लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.

भिक्षुओं के वकीलों का कहना है कि अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए शुक्रवार तक का समय है.

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