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'इराक़ हिंसा के लिए अमरीका ज़िम्मेदार' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने कहा है कि इराक़ में बढ़ती हिंसा के लिए वहाँ मौजूद विदेशी सेना ज़िम्मेदार है और वह इराक़ के आंतरिक मामलों में दख़ल नहीं दे रहा है. इससे पहले इराक़ में हालात सुधारने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के मकसद से बग़दाद में हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हो गया. इसमें ईरान और सीरिया को भी आमंत्रित किया गया था. बातचीत में हिस्सा लेने गए ईरानी उप विदेश मंत्री अब्बास अरग़ची का कहना था कि उनका देश अपने पड़ोस में स्थिरता और शांति की हिमायत करता है. उन्होंने इराक़ से विदेशी सेना हटाने की भी माँग की. सीरिया के सहायक विदेश मंत्री अहमद आर्नोस ने इराक़ियों से जातीय हिंसा का हल निकालने का आह्वान किया. उन्होंने इराक़ और अमरीका से शरणार्थी समस्या पर भी ध्यान देने को कहा. बैठक सम्मेलन के अंत में इराक़ के विदेश मंत्री होशियार ज़ेबारी ने कहा कि बातचीत सार्थक और सकारात्मक रही. उन्होंने बताया कि बैठक में कई समीतियाँ बनाने का फ़ैसला किया गया है जिसमें सुरक्षा, शर्णार्थी और ऊर्जा सप्लाई पर बात होगी. इससे पहले सम्मेलन में बोलते हुए इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने कहा था कि वहाँ चरमपंथ के खिलाफ़ कड़ा रुख अपनाया जाए. उन्होंने किसी देश पर आरोप लगाए बगैर कहा कि इराक़ में हिंसा को समर्थन देने वालों को रोकना होगा. सम्मेलन शुरू होने के कुछ देर बाद ही सद्र सिटी में धमाका हुआ जिसमें 20 लोग मारे गए हैं. वहीं सम्मेलन स्थल के पास भी दो मार्टार गोले आकर गिरे लेकिन प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक कोई घायल नहीं हुआ. अहम वार्ता यह पहला मौक़ा था जब अमरीकी अधिकारी ईरान और सीरिया के नेताओं के साथ बैठकर इराक़ के मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे अभी तक अमरीका कहता आया है कि इन देशों ने इराक़ की मुसीबतें बढ़ाईं हैं. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य इस बात पर चर्चा करना था कि इराक़ में शिया और सुन्नी समुदायों के बीच हिंसा को कैसे कम किया जा सकता है. इनके अलावा सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य, अरब लीग, खाड़ी सहयोग परिषद के प्रतिनिधि और इराक़ के अन्य पड़ोसी इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी मलिकी का कहना था कि यह सम्मेलन इस बात का सबूत है कि बग़दाद में स्थिति सामान्य होती जा रही है. बीबीसी संवाददाता जिम मूर का कहना है कि यह अहम मौक़ा था जब पड़ोसी देश ऐसे कैसे सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे. शिया-सुन्नी समस्या शिया-सुन्नी मामले में ईरान शिया समुदाय का समर्थन करता है जबकि सऊदी अरब और अरब जगत के अन्य देश इराक़ के सुन्नियों के पक्षधर हैं. संवाददाता का कहना है कि ईरान और सऊदी अरब ने हाल में लेबनान और फ़लस्तीन प्राधिकरण के संकट को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी और माना जा रहा है कि वे समस्या को सुलझाने में भी योगदान देंगे. इसके पहले इराक़ में अमरीकी सेना के नए कमांडर जनरल डेविड पेट्रास का ने कहा था कि वहाँ जारी संघर्ष को सिर्फ़ सैनिक प्रयास से समाप्त नहीं किया जा सकता. पिछले महीने इराक़ में कार्यभार संभालने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉंफ्रेंस में जनरल पेट्रास ने कहा कि यह ज़रुरी है कि विरोधी गुट भी वार्ता की मेज़ पर आएँ. उन्होंने कहा कि बग़दाद की सुरक्षा के लिए जो नई योजना बनाई गई हैं, उसमें शुरुआती दिक्क़तें आई हैं लेकिन आने वाले दिनों में हिंसा पर काबू पाया जा सकेगा. इधर अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने इराक़ में हिंसा पर नियंत्रण के लिए दो हज़ार अतिरिक्त सैन्य पुलिस बल भेजने की घोषणा की है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इराक़ समस्या का समाधान सेना नहीं'08 मार्च, 2007 | पहला पन्ना बुश ने इराक़ पर वीटो की धमकी दी08 मार्च, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में आत्मघाती हमला, 26 की मौत07 मार्च, 2007 | पहला पन्ना शाह अब्दुल्ला का शांति का आहवान07 मार्च, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में आत्मघाती हमले, 90 की मौत06 मार्च, 2007 | पहला पन्ना बग़दाद में ज़बरदस्त धमाका, 30 की मौत05 मार्च, 2007 | पहला पन्ना आत्मघाती बम हमले में 12 की मौत03 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'लौटने वाले सैनिकों के लिए आयोग बनेगा'03 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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