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शाह अब्दुल्ला का शांति का आहवान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला ने अमरीका में राजनीतिज्ञों से कहा है कि मध्य पूर्व में शांति योजना को एक प्राथमिकता बनाने के लिए अमरीका सरकार को और ज़्यादा प्रयास करने चाहिए. शाह अब्दुल्ला ने बुधवार को अमरीकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए यह बात कही है. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में यथास्थिति को बदलने की सख़्त ज़रूरत है. जॉर्डन के शाह ने चेतावनी के अंदाज़ में कहा, "मध्य पूर्व में यथास्थिति क्षेत्र और पूरी दुनिया को ख़तरे की तरफ़ लेकर जा रही है... संकट का पहिया तेज़ी से घूम रहा है." उन्होंने इसराइल-फ़लस्तीनियों के संघर्ष का एक सुझाव सामने रखते हुए कहा कि इसे इराक़ संकट से पहले हल करने की ज़रूरत है और क्षेत्र में वास्तव में बदलाव लाने का एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मौक़ा है. इसराइल-फ़लस्तीनी मुद्दो को उन्होंने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सबसे अहम मुद्दा क़रार दिया और कहा कि अमरीका को शांति बहाल करने में सीधी, ठोस और जल्दी भूमिका निभाने के लिए आगे आना चाहिए. इराक़ और लेबनान की स्थिति का ज़िक्र करते हुए शाह अब्दुल्ला ने कहा कि मध्य पूर्व में विभिन्न धार्मिक गुटों और देशों को एक दूसरे के ख़िलाफ़ बाँटने की कोशिश की गई है. शाह अब्दुल्ला ने कहा कि वर्ष 2002 में सऊदी अरब ने जो शांति योजना तैयार की थी उसे समर्थन दिया जाना चाहिए जिसमें एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र के निर्माण के बदले में इसराइल को अरब देशों की सामूहिक मान्यता की पेशकश की गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें रमल्ला में छापा, 18 गिरफ़्तार07 मार्च, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में शियाओं पर फिर हमला 07 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'नकरात्मक प्रभाव वाला देश इसराइल'06 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'लौटने वाले सैनिकों के लिए आयोग बनेगा'03 मार्च, 2007 | पहला पन्ना अहमदीनेजाद की सऊदी शाह से मुलाक़ात03 मार्च, 2007 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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