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सीनेट समिति ने इराक़ नीति ठुकराई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सीनेट की एक समिति ने राष्ट्रपति बुश के इराक़ में अतिरिक्त सैनिक भेजने के प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया है. अब इस प्रस्ताव को मतदान के लिए सीनेट के सामने रखा जाएगा. विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रणवाली विदेशी मामलों की समिति ने राष्ट्रपति बुश के प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया और कहा कि यह नीति देश हित में नहीं है. समिति ने राष्ट्रपति बुश के प्रस्ताव को 12 के मुक़ाबले 9 वोटों से अस्वीकार कर दिया. हालांकि यह मतदान राष्ट्रपति बुश को बाध्य नहीं करता है लेकिन माना जा रहा है कि इसके बाद उन्हें अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है. इसके पहले राष्ट्रपति बुश ने राष्ट्र को अपने संबोधन में अपील की थी कि इराक़ पर नई रणनीति को एक मौक़ा दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि इराक़ में विफल होने के और भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा था, "अमरीका और उसके लोगों की सुरक्षा के लिए यह ज़रूरी है कि इराक़ सहित मध्य पूर्व में शांति और एक स्वतंत्र समाज की स्थापना के लिए काम किया जाए." बुश की अपील राष्ट्रपति बुश का कहना था कि अमरीकी लोगों की सुरक्षा के लिए भी मध्यपूर्व और इराक़ में सफलता ज़रूरी है. ग़ौरतलब है कि इसके पहले अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने स्पष्ट कर दिया था कि अमरीकी कांग्रेस में विरोध के बावजूद वो इराक़ में और सैनिकों को भेजने की अपनी योजना पर अमल करेंगे. राष्ट्रपति बुश इराक़ में 21 हज़ार अतिरिक्त अमरीकी सैनिक भेजना चाहते हैं. दूसरी ओर अमरीकी संसद के दोनों सदनों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है और वह और सैनिकों को भेजने का विरोध कर रही है. डेमोक्रेटिक पार्टी की दलील है कि इससे इराक़ में अमरीकी सैनिकों की भागीदारी और बढ़ जाएगी. डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन प्रमुख सीनेटरों ने तो इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया है और कहा है कि यह फ़ैसला अमरीकी हित में नहीं है. उनका मानना है कि जल्द से जल्द वहाँ की सुरक्षा व्यवस्था इराक़ी नेताओं को सौंप दी जानी चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इराक़ पर एक मौका और दें'24 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना 'दुनिया में अमरीका की छवि ख़राब हुई'23 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना बुश प्रशासन की कड़ी आलोचना20 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना बुश सांसदों को समझाने में जुटे18 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना 'पिछले साल 34 हज़ार इराक़ी मारे गए'16 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना बुश अपनी इराक़ नीति पर दृढ़15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में और सैनिक भेजने की घोषणा 11 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना 'दुनिया में बहुमत यातना के ख़िलाफ़'19 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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