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'दुनिया में अमरीका की छवि ख़राब हुई' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के लिए ग्लोबस्कैन के सर्वेक्षण से पता चलता है कि वैश्विक मामलों में अमरीकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और उसकी छवि ख़राब हुई है. सर्वेक्षण में शामिल हुए लोगों में से तीन चौथाई ने अमरीका की इराक़ नीति को ख़ारिज कर दिया. यूरोप, एशिया, अफ़्रीका, मध्य-पूर्व और अमरीका महाद्वीप में दस में से सिर्फ़ तीन लोगों ने माना कि विश्व पटल पर अमरीका सकारात्मक भूमिका में है. अगर एक साल पहले हुए सर्वेक्षण से तुलना की जाए तो ऐसा मानने वाले लोगों की संख्या में लगभग बीस फ़ीसदी की गिरावट आई है. इस सर्वेक्षण में नवंबर से जनवरी के बीच 25 देशों के लगभग 26 हज़ार लोगों से रायशुमारी की गई. बहुमत की राय यही है कि ग्वांतानामो बे, इसराइल-हिज़्बुल्ला युद्ध और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमरीका का रूख़ ठीक नहीं है. ख़ुद सर्वेक्षण में शामिल किए गए अमरीकी लोगों ने बहुमत से इराक़ युद्ध और जलवायु परिवर्तन पर बुश प्रशासन की नीतियों को ख़ारिज कर दिया. इराक़ का असर एक बार फिर ऐसा लगता है कि विदेशों में अमरीका की धूमिल होती छवि का मुख्य कारण इराक युद्ध ही है और दुनिया भर में इसे लेकर जो गहरे अविश्वास का वातावरण है, उसकी झलक अमरीका में भी देखने को मिलती है. कुल मिलाकर 70 प्रतिशत से ज़्यादा लोगों ने इराक़ में अमरीकी नीति से असहमति जताई और अमरीका में यह संख्या थोड़ी ही कम 57 फ़ीसदी है. लेकिन अमरीकी विदेश नीति को लेकर व्याप्त चिंता का कारण सिर्फ़ इराक़ ही नहीं है. मध्य-पूर्व की एक नई तस्वीर पेश करने के लिए किए जा रहे अमरीकी प्रयासों को भी लोगों ने पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है. लेबनान में इस सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 82 प्रतिशत लोगों ने इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच हुई लड़ाई पर अमरीकी रवैये को गलत बताया. अमरीकी छवि को और अधिक सकारात्मक रूप में पेश करने की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस के कूटनीतिक प्रयासों से भी अब तक कुछ ख़ास हासिल नहीं हो पाया है. उदाहरण के तौर पर एशिया में आए सुनामी के बाद अमरीका ने जिस ढंग से तुरंत सहायता के लिए क़दम उठाए उसके दीर्घकालिक लाभ उस हद तक नहीं मिल पाए जितनी की उम्मीद की जा रही थी. इस वर्ष इंडोनेशिया को बड़ी मात्रा में अमरीकी सहायता उपलब्ध कराई गई लेकिन वहाँ के लोगों में अमरीका की छवि इस वर्ष सबसे ज़्यादा बिगड़ती नज़र आई. वाशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील का कहना है कि विदेशों में इस बिगड़ती छवि से चिंतित डेमोक्रैटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के नेता वर्ष 2008 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमरीकी विदेश नीति में आमूल चूल परिवर्तन की बात कर रहे हैं. ऐसे में बीबीसी के लिए हुए सर्वेक्षण के परिणामों का अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय या वहाँ के विदेश मंत्रालय में स्वागत भले ही नहीं हो, पर ये भी तय है कि इन परिणामों को देख कर कोई बहुत बड़ा आश्चर्य भी नहीं होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश प्रशासन की कड़ी आलोचना20 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना बुश सांसदों को समझाने में जुटे18 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना 'पिछले साल 34 हज़ार इराक़ी मारे गए'16 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना बुश अपनी इराक़ नीति पर दृढ़15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में और सैनिक भेजने की घोषणा 11 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना 'दुनिया में बहुमत यातना के ख़िलाफ़'19 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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