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इराक़ में और सैनिक भेजने की घोषणा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने इराक़ में लगभग बीस हज़ार और सैनिक भेजने की घोषणा की है. उन्होंने ईरान और सीरिया पर इराक़ में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये इराक़ी शिया चरमपंथियों को मदद कर रहे हैं. बुश ने इराक़ के लिए नई रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि वहाँ से अमरीकी सेना को हटा लेना कतई संभव नहीं है क्योंकि इससे इस्लामी कट्टरपंथी मजबूत होंगे और अमरीका को इसके परिणाम भुगतने होंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सेना भेजने के बाद तुरत हिंसा में कमी आ जाएगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा, "हमारे दुश्मन आतंक फैलाने की हर संभव कोशिश करेंगे लेकिन उनसे निपटना होगा." ग़ौरतलब है कि विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी पहले ही कह चुकी है वो इराक़ में और सैनिक भेजने के ख़िलाफ़ है. डेमोक्रैट सेना भेजने के बज़ाए इराक़ में अभी तैनात अमरीकी सैनिकों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने के पक्ष में हैं. बुश ने टेलीविज़न पर नई रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, "वर्ष 2005 के सफल चुनाव के बाद हमें इराक़ में शांति लौटने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बग़दाद समेत कई इलाक़े जातीय हिंसा की आग में झुलस रहे हैं. इसलिए हम सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए और सेना भेज रहे हैं. " उनका कहना था, "पहले हम सफ़ल नहीं हुए लेकिन इस बार रणनीति बदल चुकी है. पहले सैन्य अभियान ख़त्म होते ही चरमपंथी दोबारा सक्रिय हो जाते थे. अब ऐसा नहीं होगा. दूसरा, इराक़ी प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में राजनीतिक दख़लंदाज़ी नहीं होगी." बुश ने कहा कि नई रणनीति के तहत इराक़ी सरकार बग़दाद में एक सैन्य कमांडर और दो उपकमांडरों की नियुक्ति करेगी और सभी नौ ज़िलों में 18 ब्रिगेड तैनात किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि इराक़ी पुलिस स्थानीय पुलिस केंद्रों से अभियान चलाएगी और अमरीकी सेना उन्हें इस काम में मदद करेगी. ख़तरा बुश ने स्पष्ट किया कि इराक़ में अल क़ायदा अभी भी सक्रिय है और वहाँ से अमरीकी सेना हटने पर इनकी ताकत बढ़ेगी जिसका सीधा असर अमरीका पर पड़ेगा. बुश ने कहा कि अल क़ायदा ने इराक़ के अनबार प्रांत में गढ बनाया हुआ है और वहाँ से चरमपंथियों को खदेड़ दिया जाएगा. अनबार में चार हज़ार अमरीकी सैनिकों को तैनात किया जाएगा. उनका कहना था सेना हटाने से ईरान का दुस्साहस बढ़ेगा और वह परमाणु कार्यक्रम तेज़ कर सकता है. उन्होंने ईरान पर इराक़ के शिया चरमपंथियों को मदद पहुँचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब इस नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जाएगी. अमरीकी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि इस मुहिम में ख़तरे भी हैं. उन्होंने कहा, "हमें भविष्य में और बलिदान, धैर्य और संकल्प के लिए तैयार रहना चाहिए." विरोध अमरीकी राष्ट्रपति की घोषणा के तुरत बाद वरिष्ठ डेमोक्रैट सीनेटर डिक डर्बन ने कहा कि बुश इराक़ में अमरीकी रणनीति को ग़लत दिशा में ले जा रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम पहले ही वहाँ तीन हज़ार अमरीकी सैनिकों को खो चुके हैं. इसके बावजूद बुश ने ख़ुद अपने सैनिक सलाहकारों की राय को दरकिनार कर और सैनिक भेजने की घोषणा कर दी. वे ग़लत दिशा में जा रहे हैं." डर्बन का कहा था कि 20 हज़ार और सैनिक भेज देने से इराक़ में जारी 'गृह युद्ध' को नहीं रोका जा सकता, बल्कि इससे अमरीकी सैनिकों पर ख़तरा और बढ़ेगा. ग़ौरतलब है कि इस समय इराक़ में अमरीका के एक लाख 32 हज़ार सैनिक तैनात हैं. इससे पहले व्हाइट हाउस के सलाहकार डैन बार्टलेट ने बीबीसी को बताया कि नई रणनीति का उद्देश्य जातीय हिंसा के चक्र को तोड़ना है और इराक़ी नेतृत्व को आगे लाना है. चेतावनी दूसरी ओर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की अध्यक्ष और वरिष्ठ डेमोक्रेटिक नेता नैन्सी पेलोसी कह चुके हैं कि इराक़ में सैनिक बढ़ाने के किसी भी फ़ैसले पर संसद में मतविभाजन कराया जाएगा. डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर एडवार्ड केनेडी का कहना है कि सैनिकों की संख्या बढ़ाना 'भारी भूल' होगी. इससे पहले रीड और नैन्सी पेलोसी ने बुश को लिखे पत्र में कहा था कि इराक़ में और सैनिक भेजने से सेना में तनाव बढ़ेगा और इससे कोई रणनीतिक लाभ भी नहीं मिलने वाला है. और सैनिक भेजने के बजाए इन नेताओं ने राष्ट्रपति बुश से इराक़ में अभी तैनात अमरीकी सैनिकों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने की माँग की है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी इस पर अपना सांकेतिक विरोध जताने के लिए मतविभाजन करा सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें हर आठ में से एक इराक़ी विस्थापित09 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में सैनिक बढ़ाने को लेकर चेतावनी07 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ पर राष्ट्रपति बुश की घोषणा जल्द08 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ आरोप ख़त्म08 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना सद्दाम की फाँसी के तरीक़े से चिंतित बुश05 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना प्रधानमंत्री पद छोड़ना चाहता हूँ: मलिकी03 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना सद्दाम की फाँसी टलते-टलते बची थी02 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में सैनिक बढ़ाने की घोषणा करेंगे बुश02 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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