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सद्दाम की फाँसी टलते-टलते बची थी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फाँसी के तख़्ते पर खड़े सद्दाम हुसैन के लिए कसी जा रही फ़ब्तियों की वजह से फाँसी टलते-टलते बची. ये फ़ब्तियाँ कौन कस रहा था, इसका अभी पता नहीं है. लेकिन फाँसी के अनिधिकृत वीडियो को देखने से यह साफ़ होता है कि फाँसी की सज़ा का अनुपालन करवाने के लिए पहुँचे मुंकिथ अल-फ़रून ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की थी. यह भी सुनाई पड़ता है कि उन्होंने ताने बंद न किए जाने पर वहाँ से चले जाने की धमकी भी दी थी. यदि वे फाँसी स्थल से चले जाते तो फाँसी नहीं दी जा सकती थी क्योंकि नियमानुसार अनुपालक अधिकारी की अनुपस्थिति में फाँसी नहीं दी जा सकती. अनुपालक अधिकारी फ़रून का कहना है कि दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारी खुलेआम फाँसी की सज़ा को मोबाइल कैमरों से रिकॉर्ड कर रहे थे. और ऐसा तब हो रहा था जब अमरीकियों ने उन सभी लोगों के फ़ोन ज़ब्त कर लिए थे, जो फाँसी की सज़ा के दौरान मौजूद रहने वाले थे. अब इराक़ी सरकार ने फाँसी के दौरान फ़ब्तियाँ कसे जाने और मोबाइल फ़ोन से वीडियो फ़िल्म बनाए जाने की जाँच के लिए एक तीन सदस्यीय दल का गठन किया है. उल्लेखनीय है कि फाँसी की यह अनिधिकृत फ़िल्म मोबाइल पर और इंटरनेट पर जारी कर दी गई और इसे टेलीविज़न पर भी दिखाया गया. बग़दाद में बीबीसी संवाददाता पीटर ग्रीस्ते का कहना है कि जैसे-जैसे सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के विवरण सामने आ रहे हैं यह साफ़ होता जा रहा है कि फाँसी देते समय अफ़रातफ़री का और अपमानजनक माहौल था. और वैसा तो क़तई नहीं था जैसा कि इराक़ी सरकार दावा कर रही थी. वीडियो सद्दाम हुसैन के जीवन के अंतिम क्षणों के इस वीडियो में फाँसी देने वाले लोगों की छींटाकसी और उनके साथ बहस दिखाई गई है. इस वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि फाँसी के वक़्त मौजूद एक व्यक्ति ने उनसे कहा, "जहन्नुम में जाओगे."
अधिकारियों को आशंका है कि चोरी-छिपे बनाई गई इस वीडियो फ़िल्म की वजह से इराक़ में जातीय हिंसा को बढ़ावा मिलेगा. इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के एक सलाहकार समी अल अस्करी ने कहा, "वहाँ कुछ गार्ड मौजूद थे जिन्होंने सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ नारे लगाए और इस घटना की जाँच की जा रही है." नवंबर महीने के शुरू में इराक़ की एक विशेष अदालत ने सद्दाम हुसैन को दुजैल में शिया मुसलमानों के नरसंहार का दोषी मानते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी. सद्दाम हुसैन को शनिवार को तड़के फाँसी दी गई थी और रविवार को उनके गृह नगर तिकरित के पास उनकी लाश को दफ़ना दिया गया. इराक़ी अधिकारियों ने टेलीविज़न चैनलों के लिए एक आधिकारिक वीडियो फ़िल्म जारी की थी ताकि इराक़ी जनता को विश्वास हो सके कि सद्दाम अब जिंदा नहीं हैं. उस वीडियो में न तो किसी की आवाज़ थी और न ही सद्दाम हुसैन को फंदे से लटकता दिखाया गया था. आधिकारिक वीडियो में सिर्फ़ उनके गले में फंदा डालते हुए दिखाया गया था और फिर कफ़न में लिपटी उनकी लाश दिखाई गई थी जिसका चेहरा खुला था. |
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