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सद्दाम हुसैन को उनके पैतृक गाँव में दफ़नाया गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को उनके गाँव औजा में दफ़न कर दिया गया है. सद्दाम उसी गाँव में 69 साल पहले पैदा हुए थे. बग़दाद के उत्तर में स्थित औजा, तिकरीत के नज़दीक है. उन्हें अपने परिवार की ज़मीन पर ही दफ़न किया गया, जहाँ वर्ष 2003 में अमरीकी बमबारी में मारे गए उनके दो पुत्र भी दफ़न. पहले उनके परिजनों की इच्छानुसार उन्हें रमादी में दफ़नाए जाने की संभावन थी. 'काला अध्याय ख़त्म' पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को शनिवार को बग़दाद में फाँसी दी गई थी. इससे पहले एक इराक़ी अदालत ने उन्हें 1982 के दुजैल नरसंहार में 148 शियाओं की हत्या का दोषी पाया था और मौत की सज़ा सुनाई थी. उधर इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने को देश के इतिहास के एक काले अध्याय की समाप्ति बताया. मलिकी ने सरकारी टेलीविज़न पर पढ़े गए बयान में कहा है कि 'सद्दाम का वही हश्र हुआ जो सभी तानाशाहों का हुआ है.'
उन्होंने कहा कि लंबे अरसे से तानाशाही का दंश झेल चुका इराक़ अब उस दौर से उबर गया है. इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को शनिवार तड़के उत्तरी बग़दाद में फाँसी दी गई. इराक़ी टीवी के अनुसार सद्दाम को स्थानीय समयानुसार सुबह छह बजे से ठीक पहले फाँसी दी गई. शांति से फाँसी चढ़े इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मौफ़ाज़ अल-रूबेई और कुछ इराक़ी नागरिक सद्दाम को फाँसी दिए जाने के प्रत्यक्षदर्शी थे. इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो फ़िल्म बनाई गई है. उनका कहना था कि हथकड़ियों में सद्दाम को चुपचाप फाँसी के तख़्ते तक ले जाया गया. उनका कहना था कि सद्दाम के हाथ में पवित्र क़ुरान थी और वे काफ़ी हताश नज़र आ रहे थे. सद्दाम की फाँसी देने की प्रक्रिया के कुछ अंश बाद में इराक़ी टीवी पर दिखाए गए. हालांकि इसमें फाँसी पर लटकाने के अंशों को शामिल नहीं किया गया है. सद्दाम जब फाँसी के तख़्ते तक आए तो वो क़ैदियों की पोशाक में नहीं थे बल्कि उन्होंने सफेद कमीज़ के साथ एक गहरे रंग का ओवरकोट पहन रखा था. सद्दाम हुसैन ने फाँसी दिए जाते समय किसी तरह का विरोध नहीं किया लेकिन काला नक़ाब पहनने से इनकार कर दिया. हालांकि उन्हें फाँसी के तख़ते तक लाने वाले और फाँसी लगाने वाले लोग नकाबों से अपना चेहरा ढके हुए थे.
फाँसी देते वक़्त एक कपड़ा उनकी गर्दन में लपेट दिया गया था. फाँसी देने की प्रक्रिया को कुछ ही मिनटों में पूरा कर लिया गया था. सुरक्षा और हिंसा इराक़ में अमरीकी सैनिक और इराक़ी सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के बावजूद अनेक जगह पर हिंसा हुई है. इराक़ में अभी भी कई जगह तनाव है सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के कुछ ही घंटे बाद दक्षिणी शहर कुफ़ा में बम धमाका हुआ जिसमें 31 लोग मारे गए और क़रीब 58 लोग घायल हो गए हैं. दक्षिणी कुफ़ा शहर में बम धमाका भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में हुआ. कुफ़ा शिया मुसलमानों का एक तीर्थ स्थल है. उधर बग़दाद में शिया बहुल इलाक़ों में कई जगह ख़ुशायाँ मनाई गई हैं और लोगों ने हवा में गोलियाँ चलाई गई. प्रतिक्रिया जैसे ही सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने की ख़बरें आई, इराक़ में कुछ जगहों पर शिया समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी खुशी का इज़हार किया. हालांकि दुनियाभर में सद्दाम को फाँसी दिए जाने पर मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. दुनिया के कई देशों ने फाँसी दिए जाने की बात से अपनी असहमति व्यक्त की और इसे ग़लत ठहराया. कई देशों की ओर से कहा गया है कि फाँसी देने की बात को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता है चाहे वह किसी भी व्यक्ति के लिए हो. दुनियाभर में कुछ लोगों ने सद्दाम को सज़ा सुनाने के लिए चलाई गई न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं. |
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