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सद्दाम ने मेल मिलाप का संदेश दिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मौत की सज़ा पा चुके सद्दाम हुसैन ने इराक़ी जनता से 'आपस में मेल मिलाप और एक दूसरे को माफ़ करने की भावना' के साथ रहने की अपील की है. इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन मंगलवार को नरसंहार के एक और मामले में बग़दाद की एक अदालत में हाज़िर हुए और अदालत में ही इराक़ियों से राष्ट्रीय एकता का अनुरोध किया. उन्होंने कहा, "मैं सभी इराक़ियों, अरबों और कुर्दों से एक दूसरे को माफ़ करने, मेल मिलाप बढ़ाने और आपस में हाथ मिलाने का आह्वान करता हूँ." सद्दाम को दो दिन पहले ही दुजैल नरसंहार के मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई थी. सद्दाम और उनके छह सहयोगियों पर 1980 के दशक में उत्तरी इराक़ में कुर्दों के खिलाफ़ सैन्य अभियान 'अनफ़ल' चलाने का इल्ज़ाम है. इस अभियान में एक लाख 80 हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे. सद्दाम अपनी चिर परिचित पोशाक, बगैर टाई लगी सफेद कमीज़ और गहरे रंग के सूट में कोर्ट में उपस्थित हुए. अपनी सीट तक पहुँचने के दौरान वह थोड़ा मुस्कराए, लेकिन रविवार को मौत की सज़ा सुनाए जाने की तुलना में आज वह शांत दिख रहे थे. अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इराक़ी प्रशासन सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा देने से पहले दूसरे मामले के निर्णय का इंतज़ार करेगा या नहीं. मौत की सज़ा के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील अपने आप दायर हो जाएगी और इस पर नौ न्यायाधीशों का पैनल निर्णय करेगा. फ़ैसला इस साल के आख़िर या अगले साल की शुरुआत में आने की उम्मीद है और अग़र मौत की सज़ा का निर्णय कायम रहता है तो 30 दिनों के भीतर सद्दाम को फ़ाँसी देनी होगी. अपराध अदालत ने सद्दाम को दुजैल में 148 लोगों की हत्या का दोषी पाया था. 1982 में खुद पर हुए हमले के बाद सद्दाम के आदेश पर शिया शहर दुजैल में सैन्य अभियान चलाया गया था. इराक़ में शियाओं के नेतृत्व वाली सरकार के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने साफ-साफ कहा है कि वह जल्द से जल्द सद्दाम को फाँसी देना चाहते हैं. लेकिन कुछ कुर्द राजनेताओं ने कहा है कि वे चाहते हैं कि पहले अल-अनफ़ल मामले की सुनवाई पूरी की जाए. कुर्द नरसंहार पहले मुक़दमे का फ़ैसला सुनाए जाने के दौरान शहर में लगा कर्फ़्यू हटा देने के बाद 'अनफ़ल' मुक़दमे की सुनवाई शुरू की गई है. ईरान-इराक युद्ध के बाद सद्दाम के शासन में 1988 से 1989 तक कुर्द विद्रोहियों के ख़िलाफ़ ‘अल-अनफ़ल’ नामक सैन्य अभियान चलाया गया था. इस अभियान में ज़्यादातर मौतें रासायनिक गैस से हुई थी. अन्य आरोपियों में शामिल अली हसन अल माजिद उर्फ़ केमिकल अली को ‘अल-अनफ़ल’ का मास्टरमाइंड माना जाता है. इस मामले की सुनवाई इस साल अगस्त में शुरू हुई थी. गवाह मंगलवार को पहले गवाह कहर ख़लील मोहम्मद ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने और उनके गाँव के अन्य लोगों ने इराक़ी सैनिकों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था. उन्होंने कोर्ट को बताया कि इराक़ी सैनिकों ने किस तरह से लोगों को कतार में खड़ा कर गोली मारी. ख़लील मोहम्मद ने कहा कि बुरी तरह घायल होने के बावजूद वह किसी तरह बच गया, लेकिन उसके गाँव के 33 लोग मारे गए. सद्दाम ने इन आरोपों को नकार दिया और कहा कि कोई भी मोहम्मद के बयानों को सत्यापित नहीं कर सकता. | इससे जुड़ी ख़बरें सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा05 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना सद्दाम और जजों के बीच नोंक-झोंक05 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ी प्रधानमंत्री ने स्वागत किया05 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'सद्दाम को सज़ा मील का पत्थर'06 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना किसी को भी मौत की सज़ा के पक्ष में नहीं हैं ब्लेयर06 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'अरब मीडिया में फ़ैसले की आलोचना'06 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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