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रविवार, 05 नवंबर, 2006 को 15:05 GMT तक के समाचार
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सद्दाम और जजों के बीच नोंक-झोंक
सद्दाम
अदालत में सद्दाम खुद को इराक़ी राष्ट्रपति ही बताते रहे हैं
दुजैल मुक़दमे की सुनवाई के दौरान सद्दान हुसैन अकसर जज के साथ तकरार पर उतर आते थे. जज रऊफ़ अब्दुर रहमान के साथ उनकी तीखी नोंक-झोक हुई.

जज रिज़गर अमीन के बाद रऊफ अबदुर रहमान जज वनाये गये. पेश हैं जजों के साथ सद्दाम हुसैन की नोंक-झोक के कुछ अंश.

सद्दाम हुसैन और जज अमीन: 19 अक्तूबर 2005

जजः मिस्टर सद्दाम हम आपका परिचय चाहते हैं. प्लीज़ पूरा नाम बताइए.

सद्दामः सबसे पहले आप यह बताइए कि आप कौन हैं. मैं जानना चाहता हूँ आप कौन हैं. क्या आप जजों में से हैं. मैं इस इमारत में सुबह आठ बजे से बैठा हूँ.

जजः मिस्टर सद्दाम प्लीज़ बैठ जाएँ. हम दूसरे लोगों का परिचय लेंगे और बाद में हम आप से शुरू करेंगे.

सद्दामः मैं यहाँ सुबह 9 बजे से इन्हीं कपड़ों में हूँ.

जजः अच्छा अब आप बैठ सकते हैं और पूरी तसल्ली रखिए और अपना परिचय दीजिए.

सद्दामः आप मुझे जानते नहीं मैं थकता नहीं हूँ.

जजः यह अदालत का शिष्टाचार है. हम आप से आप का परिचय जानना चाहते हैं. यह एक प्रक्रिया है इसलिए प्लीज़ बातइए.

सद्दामः मैंने आपसे किसी के ख़िलाफ़ कोई बात नहीं की लेकिन सच्चाई और इराक़ की महान जनता की इच्छा को ध्यान में रखते हुए और अदालत में मौजूद सभी लोगों से मैं कहता हूँ कि मैं इस अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं हूँ और मैं इराक़ का राष्ट्रपति होने के नाते अपने सभी अधिकार बहाल करता हूं.

जजः इन तमाम मामलों पर बाद में भी बहस की जा सकती हैं. अदालत का इन मामलों से कोई सरोकार नहीं है.

सद्दामः न तो मैं ऐसी किसी संस्था को स्वीकार करता हूँ जिसके आदेश से इस अदालत को लगाया गया है और न ही मैं इस जुर्म को स्वीकार करता हूँ. ये सारी चीज़े झूठ की बुनियाद पर टिकी हैं.

 न तो मैं एसी किसी संस्था को स्वीकार करता हूँ जिसके आदेश से इस अदालत को लगाया गया है और न ही मैं इस जुर्म को स्वीकार करता हूँ. ये सारी चीज़े झूठ की बुनियाद पर टिकी हैं.
सद्दाम हुसैन

( अंततः सद्दाम अपनी कुर्सी पर बैठ जाते हैं और जज इनका नाम पढ़ते हैं और उन्हें पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति के तौर पर संबोधित करते हैं.)

सद्दामः मैंने कहा है कि मैं इराक़ का राष्ट्रपति हूँ. मैंने अपदस्थ नहीं कहा.

सद्दाम और जज रहमानः 29 जनवरी 2006

(सद्दाम को अपनी बारी के बग़ैर बोलने के चलते अदालत से बाहर जाने का आदेश दिये जाने के बाद)

सद्दाम: मैंने 35 वर्षों तक आपका नेतृत्व किया है और आप मुझे अदालत से बाहर जाने का हुक्म दे रहे हैं.

जजः मैं जज हूँ और आप अपना बचाव करने वाले हैं. आपको मेरी बात माननी होगी.

सद्दाम और जज अब्दुर रहमानः 13 फ़रवरी 2006

(सद्दाम अदालत में दाख़िल होते हैं)

सद्दाम: बुश मुर्दाबाद. इराक़ ज़िंदाबाद. आप हमें यहां ज़बरदस्ती क्यों लाए हैं. आपके अधिकार क्या आपको मुल्ज़िम की अनुपस्थिति में कार्रवाई करने की अनुमति देते हैं.

जजः क़ानून पर अमल किया जाएगा.

सद्दामः (चिल्लाते हुए) आपको शर्म आनी चाहिए.

सद्दाम और जजः 14 फ़रवरी 2006

(सद्दाम चिल्लाते हुए अदालत में पेश होते हैं)

सद्दाम: मुजाहिदीन ज़िंदबाद. मैं तमाम इराक़ियों से कहता हूँ कि लड़ो और अपने देश को आज़ाद कराओ.

सद्दाम और जज रहमानः 1 मर्च 2006

(सद्दाम का भाषण शुरू होते ही जज इनका माइक बंद कर देते हैं)

जजः आप अपनी मर्यादा का ख़्याल रखें

सद्दामः (चिल्लाते हुए) आप अपनी इज़्ज़त का ख़्याल रखें.

 मैं जज हूं और आप अपना बचाओ करने वाले हैं. आपको मेरी बात माननी होगी
जज

जजः आप एक बड़े मुक़दमे के अभियुक्त हैं जिसका संबंध मासूम लोगों के नरसंहार से है. आपको इस आरोप के संबंध में बात करनी चाहिए.

सद्दामः बग़दाद में मरने वालों के बारे में आपका क्या ख़्याल है. क्या ये लोग मासूम नहीं थे.

सद्दाम और जज रहमानः 22 मई 2006

सद्दाम अपने वकीलों में से एक को हटाए जाने के पर ऐतराज़ करते हैं.

सद्दाम: मैं सद्दाम हुसैन हूं. इराक़ का राष्ट्रपति. मैं आप और आपके पिता के ऊपर हूं.

जज(क्रोधित होकर): अब आप राष्ट्रपति नहीं बल्कि एक अभियुक्त हैं.

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