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रविवार, 05 नवंबर, 2006 को 23:08 GMT तक के समाचार
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इराक़ी प्रधानमंत्री ने स्वागत किया
मलिकी
मलिकी ने कहा है कि प्रताड़ित लोगों का दर्द इस फ़ैसले से कुछ कम होगा
सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा के फ़ैसले का स्वागत करते हुए इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी मलिकी ने इसे 'एक पूरे काले दौर' के ख़िलाफ़ फ़ैसला बताया है.

उन्होंने कहा है कि जो सज़ा सद्दाम हुसैन को सुनाई गई है वह उसी के हक़दार थे.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा इराक़ियों के लिए तानाशाह के राज से क़ानून-व्यवस्था के शासन के रास्ते में मील का पत्थर है.

इस बीच सद्दाम हुसैन को सज़ा सुनाए जाने का शिया समुदाय ने स्वागत किया है तो सुन्नी समुदाय ने इसकी निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किए हैं.

विश्व स्तर पर भी इसे लेकर मिश्रित किंतु व्यापक प्रतिक्रिया हुई है.

उल्लेखनीय है कि इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को रविवार को एक अदालत ने 1982 के दुजैल नरसंहार मामले में मौत की सज़ा सुनाई है.

साथ में उनके सौतेले भाई बरज़ान इब्राहिम अल तिकरिती को भी मौत की सज़ा सुनाई गई है.

दोनों को ही इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने का मौक़ा है.

लेकिन इस बीच सद्दाम हुसैन और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ कई हज़ार कुर्दों को मारने का मुक़दमा और चल रहा है.

बुश भी ख़ुश

इराक़ी प्रधानमंत्री ने कहा है कि यह फ़ैसला किसी एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ दिया गया फ़ैसला नहीं है बल्कि यह एक पूरे काले दौर के ख़िलाफ़ फ़ैसला है.

बुश
बुश ने इस फ़ैसले को इराक़ के लिए मील का पत्थर कहा है

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से उन विधवाओं और अनाथ लोगों का दर्द कम होगा जिन्होंने उस दौर में प्रताड़ना का शिकार हुए हैं.

इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति बुश ने माना कि इराक़ को अभी लंबा रास्ता तय करना है लेकिन इतिहास में इस दिन को आज़ाद और न्यायसंगत समाज की ओर एक क़दम के रुप में दर्ज किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन ने जिन लोगों को न्याय से वंचित कर दिया था, उन्हें अब न्याय मिला है.

चुनाव प्रचार के बीच प्रतिक्रिया देते हुए बुश ने कहा कि यह इराक़ के लोकतंत्र और संवैधानिक सरकार की बड़ी उपलब्धि है.

राष्ट्रपति बुश ने अपनी प्रतिक्रिया के अंत में इराक़ में तैनात अमरीकी सैनिकों और उनके परिवारजनों के प्रति कृतज्ञता ज़ाहिर की.

ऐसे समय में जब चुनावों में बुश प्रशासन की इराक़ नीति पर बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं सद्दाम हुसैन के फ़ैसले के समय को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इन आरोपों को निराधार बताया था कि सद्दाम हुसैन के मामले के फ़ैसले का अमरीकी चुनाव से कोई लेना देना है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि यह कहना कि षडयंत्रपूर्वक ऐसा किया गया है, अनर्गल है.

नारे

अदालत में जज रउफ़ अब्देल रहमान ने फ़ैसला पढ़कर सुनाने से पहले सद्दाम हुसैन को खड़े होने को कहा लेकिन सद्दाम हुसैन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

इसके बाद उन्हें ज़बरदस्ती उनकी सीट से हटा दिया गया.

प्रदर्शन

जब जज ने अपना फ़ैसला पढ़ना शुरू किया तो सद्दाम हुसैन चिल्ला रहे थे- अल्लाहु अकबर, इराक़ ज़िंदाबाद, इराक़ी जनता ज़िंदाबाद.

सद्दाम हुसैन फ़ैसला सुनकर सदमे में नज़र आ रहे थे. फ़ैसला सुनाए जाने के दौरान सद्दान हुसैन चिल्लाते रहे औऱ उन्होंने अदालत, जज और इराक़ में अमरीकी सैनिकों के ख़िलाफ़ बोला.

बीबीसी संवाददाता जॉन सिम्पसन का कहना है कि जब सद्दाम हुसैन को अदालत से बाहर ले जाया जाने लगा, तो वे काफ़ी शांत दिख रहे थे और उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान भी थी.

ख़ुशी और नाराज़गी

अदालत का फ़ैसला आने के बाद राजधानी बग़दाद के कुछ इलाक़ों में गोलियाँ चलाए जाने की आवाज़ें सुनाई दी.

इस फ़ैसले का शिया बहुल इलाक़ों में व्यापक स्वागत हुआ. ख़ासकर सद्र और नज़फ़ शहरों में शियाओं ने घरों से बाहर आकर ख़ुशी ज़ाहिर की और हवा में गोलियाँ चलाईं.

लेकिन सद्दाम हुसैन के गृह नगर तिकरित में लोग ख़ासे नज़र आए. वहाँ सद्दाम हुसैन के समर्थकों ने कर्फ्यू की परवाह किए बिना सद्दाम हुसैन की तस्वीरें लेकर रैलियाँ निकालीं और नारे लगाए.

इस बीच यूरोपीय संघ ने इराक़ी प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे मौत की सज़ा पर अमल न करें.

भारत ने सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जीवन और मौत का फ़ैसला विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया से होना चाहिए.

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