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अमरीकी चुनाव में इराक़ पर सवाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में अहम संसदीय चुनाव को दो दिन ही रह गए हैं और बुश प्रशासन को अपनी इराक़ नीति को लेकर कड़ी निंदा का सामना करना पड़ रहा है. रक्षा मामलों के चार अख़बारों ने अपनी सयुक्त संपादकीय में माँग की है कि रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफेल्ड इस्तीफ़ा दें. उधर प्रचार करते हुए राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने लोगों से कहा है कि वे इराक़ के बदले अर्थव्यवस्था के बारे में सोचें. इस मध्यावधि चुनाव की बहुत अहमियत है क्योंकि इस बार विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को उम्मीद है कि वह सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त कर लेगी. दोष जिन चार अख़बारों ने संपादकीय लिखी है उनमें आर्मी टाइम्स, एयरफ़ोर्स टाइम्स, नेवी टाइम्स और मरीन कॉप्स टाइम्स शामिल है. इन अख़बारों का कहना है कि रम्सफ़ेल्ड की वजह से ही अमरीका को इराक़ में असफलता हाथ लगी है. थोड़े दिनों पहले ही राष्ट्रपति बुश ने रक्षामंत्री रम्सफ़ेल्ड का ज़ोरदार बचाव करते हुए बयान दिया था. अब पता चल रहा है कि इराक़ पर हमले की हिमायत करने वाले कई वरिष्ठ सलाहकार भी अब इराक़ में चल रही कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं. इन्हीं में से एक रिचर्ड पेरले ने एक पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में कहा है कि अमरीका की इराक़ नीति त्रासदी साबित हुई है. जबकि केनेथ एडलमैन का कहना है कि राष्ट्रपति बुश की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार समिति पिछले दस सालों में सबसे ख़राब है. हालांकि तीसरे सलाहकार डेविड फ़्रम ने कहा है कि कुछ बयानों को ज़रुरत से ज़्यादा तूल दिया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें बम की जानकारी देने वाली वेबसाइट बंद03 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'अमरीका अन्य देशों को दोष देना बंद करे'02 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी कंपनी इराक़ में काम बंद करेगी02 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी मुसलमानों की निगाहें चुनावों पर 25 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ी सेना के बारे में आशान्वित हैं ब्रिटेन22 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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