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'फ़लस्तीनी संगठनों में संघर्ष विराम' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़ज़ा में हिंसा रोकने के लिए सत्तारूढ़ हमास और राष्ट्रपति महमूद अब्बास की फ़तह पार्टी में संघर्ष विराम पर सहमति हो गई है. हमास के अधिकारियों का कहना है कि फ़तह के साथ संघर्षविराम पर सहमति हो गई है. फ़तह ने भी इसके पहले फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास के जल्दी चुनाव कराने की अपील के बाद ग़ज़ा पट्टी में हिंसा बढ़ गई थी और गोलीबारी में एक महिला की मौत हो गई थी. फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने शनिवार को जल्दी चुनाव कराने की अपील की थी जिसके बाद ग़ज़ा पट्टी में हिंस की घटनाओं में तेज़ी आई है. अब्बास की फ़तह पार्टी और सत्ताधारी हमास समर्थकों के बीच गोलीबारी हुई हैं. दोनों गुटों के बीच हुई गोलीबारी में एक उन्नीस वर्ष की युवती की मौत हो गई. इससे पहले कुछ बंदूकधारियों ने हमास सरकार में विदेश मंत्री महमूद ज़हर के काफ़िले पर गोलीबारी की लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ. थोड़ी देर बाद महमूद अब्बास के सरकारी निवास पर गोलियाँ दागी गईं हालाँकि अब्बास उस समय घर मौजूद नहीं थे. महमूद अब्बास के सुरक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण कैंप पर भी हमला किया गया जिसमें एक सुरक्षाकर्मी मारा गया और तीन अन्य घायल हो गए. कुछ सरकारी मंत्रालयों के बाहर भी गोलीबारी की गई. इस बीच प्रधानमंत्री इस्माईल हानिया ने जल्द चुनाव कराने के आह्वान की आलोचना की है कहा है कि इससे ख़ून-ख़राबा और बढ़ेगा. हानिया ने कहा, "फ़लस्तीनी सरकार समय से पहले चुनाव कराए जाने की अपील का विरोध करती है क्योंकि यह असंवैधानिक है और इससे फ़लस्तीनी इलाक़ों में परेशानियाँ और बढ़ सकती है." ज़रूरी कदम इस बीच महमूद अब्बास ने रविवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाक़ात की. केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रमुख हाना नासिर ने कहा कि मौजूदा स्थिति में चुनावों की तैयारी में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा. जानकारों का कहना है कि महमूद अब्बास ने चुनाव कराने का आह्वान इसलिए किया है क्योंकि वे पश्चिमी देशों की पाबंदियों को हटवाना चाहते हैं.
शनिवार को रामल्ला में अब्बास ने आर्थिक पाबंदियों के लिए हमास को दोषी ठहराया औऱ कहा कि इससे फ़लस्तीनी लोगों की आय आधी हो गई है. साल की शुरुआत में हुए चुनावों में हमास ने जीत दर्ज की थी लेकिन उसके बाद से ही पश्चिमी देशों ने फ़लस्तीनी क्षेत्रों को दी जाने वाली सहायता रोक दी थी और आर्थिक पाबंदियाँ लगा दी थी. दरअसल हमास ने हिंसा का रास्ता छोड़ने और इसराइल को मान्यता देने की पश्चिमी देशों की अपील को ठुकरा दिया था. प्रतिक्रिया येरुशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता निक थोर्पे के मुताबिक़ महमूद अब्बास के बयान से हमास और फ़तह के बीच प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी. कई फ़लस्तीनी लोगों का कहना है कि अब्बास को लोकताँत्रिक तरीक़े से चुनी गई हमास सरकार को बर्ख़ास्त करने का कोई हक़ नहीं है. हमास को सत्ता में आए अभी नौ महीने ही हुए है और इस सरकार का कार्यकाल वर्ष 2010 में पूरा होना है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महमूद अब्बास की चुनावों की अपील का स्वागत किया गया है. अमरीकी प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि चुनावों से क्षेत्र में हिंसा समाप्त करने में मदद मिलेगी. उधर मध्य पूर्व का दौरा कर रहे ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से महमूद अब्बास के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की. इसराइल ने कहा है कि वह फ़लस्तीनी क्षेत्रों में शाँति क़ायम करने के महमूद अब्बास के प्रयासों का समर्थन करता है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सक्रिय फ़्रलस्तीनी प्राधिकरण ज़रूरी'16 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना हमास और फ़तह समर्थकों के बीच संघर्ष15 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना फ़तह-हमास समर्थकों के बीच गोलीबारी12 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन के पक्ष में प्रस्ताव02 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना फ़लस्तीनियों के साथ शांति का प्रस्ताव27 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इसराइल-फ़लस्तीनियों में संघर्ष विराम25 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना राष्ट्रीय एकता सरकार पर बातचीत टली20 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना अरब देशों की प्रतिबंध तोड़ने की घोषणा12 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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