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संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन के पक्ष में प्रस्ताव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अमरीका और इसराइल की आपत्तियों के बावजूद फ़लस्तीन के समर्थन में छह प्रस्तावों को पारित कर दिया है. तीन दिन की चर्चा और भाषणों के बाद महासभा ने फ़लस्तीनियों के स्वतंत्र राष्ट्र और फ़लस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय पर ज़ोर दिया. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ग़ज़ा के संदर्भ में 26 नवंबर को दोनों पक्षों के बीच हुए संघर्षविराम का भी स्वागत किया. महासभा का मानना था कि दोनों पक्षों को संघर्षविराम बनाए रखना चाहिए और ये भी उम्मीद जताई कि इससे मध्य पूर्व समस्या के हल के लिए बातचीत का रास्ता निकल सकता है. महत्वपूर्ण है कि ये प्रस्ताव क़ानूनी तौर पर बाध्य नहीं हैं. ग़ौरतलब है कि फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि फ़लस्तीनी सरकार दोनो पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहे देशों की माँग मानते हुए इसराइल को मान्यता दे देगी. उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने हाल में कहा था कि अरब-इसराइल मसले को सुलझाने में लगातार विफल होने से 'सुरक्षा परिषद की वैधता और प्रभाव' पर सवाल खड़े हो गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हमास ने सरकारी कार्यालयों को बंद किया02 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना ग़ज़ा में हिंसा, आठ की मौत01 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना गज़ा पर इसराइली हमले में छह की मौत14 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'छापे में सात फ़लस्तीनियों की मौत'23 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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