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ग़ज़ा में हिंसा, आठ की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़ज़ा में अस्पताल सूत्रों के मुताबिक हमास और फ़तह गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों में आठ फ़लस्तीनी मारे गए हैं और कम से कम 60 लोग घायल हुए हैं. झड़पें तब शुरू हुईं जब पुलिस और अन्य सरकारी अधिकारी वेतन न मिलने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे. ये लोग फ़लस्तीनी संसद के पास प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान सत्ताधारी पार्टी हमास के प्रति वफ़ादर मिलिशिया के लोगों ने प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की. हमास के लोगों ने पहले हवा में गोलियाँ चलाईं. इसके बाद हमास के कार्यकर्ताओं और फ़तह के प्रति वफ़ादार पुलिसकर्मियों के बीच गोलबारी हुई. उधर फ़तह के समर्थकों ने रमल्ला में प्रधानमंत्री इसमाइल हानिया के कार्यालय को आग लगा दी. इससे पहले ग़ज़ा के खान यूनुस में भी हिंसक घटना हुई. समझौता हमास सरकार के प्रवक्ता ग़ाज़ी हमाद ने कहा है कि सड़कों पर मिलिशिया का होना ज़रूरी था ताकि ग़ज़ा में व्यवस्था कायम रहे. फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के कार्यालय ने कहा है कि उन्होंने आदेश दिया है कि कोई भी सुरक्षाकर्मी प्रदर्शन में हिस्सा न लें. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले कुछ समय से ग़ज़ा में माहौल तनावपूर्ण था और सरकारी कर्मचारियों को छह महीने से वेतन नहीं मिला था. हिंसा न त्यागने और इसराइल को मान्यता न देने के चलते हमास की नेतृत्व वाली सरकार को यूरोपीय संघ और अमरीका वित्तीय मदद नहीं दे रहे हैं. फ़तह और हमास के सरकार गठन को लेकर सहमति बनाने की कोशिशें चल रही हैं. लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि कि रविवार को हिंसक वारदातों के बाद समझौता हो पाना थोड़ा मु्श्किल लग रहा है.. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत का आभारी है फ़लस्तीनी प्रशासन29 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना राष्ट्रीय एकता सरकार का मुद्दा अटका23 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ग़ज़ा के लोगों में निराशा और हताशा08 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना फ़लस्तीनी क्षेत्र के लिए 50 करोड़ डॉलर01 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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