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भारत का आभारी है फ़लस्तीनी प्रशासन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी प्रशासन ने जीवनरक्षक दवाएँ समय रहते भेजने के लिए भारत सरकार के प्रति गहरा आभार प्रकट किया है. फ़लस्तीनी प्रशासन का कहना है कि "इन दवाओं की सख़्त ज़रूरत थी और भारत ने वैचारिक प्रतिबद्धता दिखाते हुए दवाएँ भेजने का निर्णय लिया." फ़लस्तीनी कैबिनेट के प्रमुख रफ़ीक हुसैनी ने कहा, "हम भारत भारत का आभार मानते हैं कि उन्होंने समय रहते वे ज़रूरी दवाएँ हमें भेजीं जिनकी हमें सख़्त ज़रूरत थी, ख़ास तौर पर ऐसी हालत में जबकि गज़ा पट्टी में स्थिति गंभीर है." हुसैनी ने कहा, "भारत फ़लस्तीनियों के दर्द को समझता है और उनके मुद्दे का सम्मान करता है तभी तो उसने यह क़दम उठाया." फ़लस्तीनी क्षेत्र में भारत के प्रतिनिधि ज़िक्रउर रहमान दवाइयों की दूसरी खेप हुसैनी को सौंपी, भारत ने फ़लस्तीनी क्षेत्र में लगभग 10 करोड़ रूपए मूल्य की जीवनरक्षक दवाएँ भेजी हैं. दवाइयों की पिछली खेप अगस्त महीने में फ़लस्तीनी प्रशासन को सौंपी गई थी. इस मौक़े पर भारतीय प्रतिनिधि ने कहा, "ये दवाएँ भारत के लोगों और फ़लस्तीनी लोगों के बीच मैत्री और एकजुटता की भावना को दर्शाती हैं." गज़ा पट्टी में अस्पतालों की हालत काफ़ी ख़राब हैं और जीवनरक्षक और बुनियादी दवाओं की भारी कमी है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार दूत जॉन दुगार्ड ने गुरूवार को गज़ा पट्टी का दौरा करने के बाद कहा कि वहाँ की हालत "असहनीय, दुखदायी और स्वीकार करने योग्य नहीं है." हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि गज़ा पट्टी के अस्पतालों की हालत बहुत ख़राब है और वे मरीज़ों की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं. फ़लस्तीनी स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, "जीवनरक्षक दवाओं की ख़ास तौर पर कमी है और भारत से आई सप्लाई से हमें बहुत राहत मिली है." | इससे जुड़ी ख़बरें फ़लस्तीनी उप प्रधानमंत्री हिरासत में19 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना मध्यपूर्व पर रोम में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन26 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 'गज़ा में सेना का अनुपातहीन उपयोग'07 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना सैनिक को रिहा करने की अपील07 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइली हमले में 22 फ़लस्तीनी मरे, संघर्ष जारी06 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना ग़ज़ा में भारी लड़ाई, 22 फ़लस्तीनी मरे06 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना ग़ज़ा अभियान की आलोचना 04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना अगवा किया गया 'सैनिक जीवित है'04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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