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इसराइली हमले में 22 फ़लस्तीनी मरे, संघर्ष जारी
इसराइली टैंक
इसराइली सैनिक फ़लस्तीनी इलाक़े में काफ़ी अंदर तक दाख़िल हो गए हैं
हमास के नेतृत्व वाली फ़लस्तीनी सरकार के गृहमंत्री ने सुरक्षाबलों से गज़ा की ओर बढ़ रही इसराइली सेना का प्रतिरोध करने के निर्देश दिए है.

इसराइली सैनिकों का फ़लस्तीनी इलाक़े में अंदर तक दाख़िल होना जारी है और इस दौरान ग़ज़ा पट्टी में भारी लड़ाई होने की ख़बरें हैं. जिसमें में कम से कम 20 फ़लस्तीनी मारे गए हैं.

जिनमें कुछ आम लोग हैं और एक इसराइली.

फ़लस्तीनी गृहमंत्री सियाम ने अपने प्रवक्ता के ज़रिए जारी एक बयान में कहा है कि ये उनका नैतिक, राष्ट्रीय और धार्मिक कर्तव्य है कि वे फ़लस्तीनी नागरिकों की रक्षा करें.

उल्लेखनीय है कि 25 जून को फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने एक इसराइली सैनिक को बंधक बना लिया था और उसी को छुड़ाने के लिए इसराइली सेना ने गज़ा में प्रवेश किया है.

निर्देश

इसराइली सेना ने कई महत्वपूर्ण फ़लस्तीनी ठिकानों पर हमले किए हैं और हमास के कई महत्वपूर्ण नेताओं सहित फ़लस्तीनी प्रशासन के एक तिहाई मंत्रिमंडल को बंधक बना लिया है.

फ़लस्तीनी सुरक्ष बलों को प्रतिरोध के निर्देश जारी करने वाले गृहमंत्री ख़ुद भी भूमिगत हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि फ़लस्तीनी सुरक्षा बलों का बड़ा हिस्सा राष्ट्रपति महमूद अब्बास का वफ़ादार है.

और अभी ये स्पष्ट नहीं है कि वे हमास के गृहमंत्री के निर्देशों का कितना पालन करेंगे.

इसराइली हमले

पिछली गर्मियों में इसरायली सेना के गज़ा छोड़ने के बाद से ये अब तक का सबसे बड़ा हमला है.

इसराइली टैंक
इसराइली टैंक लगातार हमला कर रहे हैं

इसरायली सेना ने फिर से उन उजाड़ पड़ी यहूदी बस्तियों के आसपास मोर्चा बाँध लिया है जिन्हें पिछले साल खाली कर दिया गया था.

साथ ही सेना भीडभाड़ वाले शहरी इलाक़ों के इर्द गिर्द भी डेरा डाल चुकी है.

लेकिन उन्हें जवाबी हमलों का सामना करना पड़ रहा है.

हथियारों से लैस नकाबधारी फ़लस्तीनी गलियों में घूम रहे हैं और कई बार इसरायली टैंकों पर घात लगाकर हमले कर चुके हैं. वहीं आसमान में इसरायली हेलीकॉपटर मंडरा रहे हैं और चरमपंथियों को हमेशा हवाई हमले का डर बना रहता है.

लेकिन लियाद अलतोन जैसें लोग, जिनका इस इलाक़े में घर है, परिवार है, काफ़ी डरे सहमे दिन बिता रहे हैं.

वे कहते हैं, "ये बहुत ख़राब समय है. मुझे अपने बच्चों के लिए, अपने बेटों, अपनी पत्नी, अपने दादा दादी सबके लिए डर लगा हुआ है जो उपरी माले पर रहते हैं. हम बाहर नहीं निकल सकते . हम जाएँ तो कहाँ जाएँ. हम अपना देश भी तो नहीं छोड़ सकते."

इसरायल उन चरमपंथियों को पीछे धकेलने की कोशिश में है जो गज़ा से इसरायली इलाक़ों पर देसी रॉकेट दागते रहते हैं.

वहीं चरमपंथियों का कहना है कि वो इसरायली हवाई हमलों, उनकी ओर से की गई गिरफ़्तारियों और हत्याओं का बदला लेने के लिए ये रॉकेट दागते हैं.

बफ़र ज़ोन

ग़ज़ा में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसराइली उत्तरी ग़ज़ा में एक बफ़र ज़ोन क़ायम करना चाहते हैं जिससे फ़लस्तीनी चरमपंथियों को इसराइली सीमा से दूर रखा जा सके.

हालाँकि इसराइल ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि वह ग़ज़ा पर फिर से अपना क़ब्ज़ा करना चाहता है.

फ़लस्तीनी सरकार ने इसराइली कार्रवाई की यह कहते हुए आलोचना की है कि वह यह कार्रवाई करके आम फ़लस्तीनियों को सामूहिक दंड दे रहा है.

विशेष टीम

इस बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने जिनेवा में ये फ़ैसला किया है कि गज़ा में एक विशेष टीम को भेजा जाएगा जो वहां की स्थिति का जायज़ा लेगी.

हमले के बाद

कुछ अरब देशों ने गज़ा के मामले पर परिषद की विशेष बैठक बुलाई थी और कई अन्य देशों ने भी उनका समर्थन किया था.

लेकिन जब वहां विशेष टीम भेजने को लेकर वोटिंग हुई तो मानवाधिकार परिषद बँटा हुआ दिखा. कुछ देशों का कहना था कि इस प्रस्ताव में फ़लस्तीनियों की ओर से हो रही हिंसा का कोई ज़िक्र नहीं है.

आमतौर पर ये सहमति है कि गज़ा में हो रही हिंसा पर मानवाधिकार परिषद को ध्यान देना चाहिए.

लेकिन डर यह भी है कि केवल एक पक्ष यानी इसरायल की गतिविधियों पर ध्यान देकर कहीं परिषद फिर से पुराने दिनों की ओर नहीं लौट जाए जब ये परिषद मानवाधिकार आयोग कहलाता था और एक राजनीतिक रंग में रंग चुका था.

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