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फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री का कार्यालय उड़ाया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली हेलीकॉप्टरों ने गज़ा शहर में फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्लमाइल हानिया के कार्यालय पर हमला किया है और उसे नष्ट कर दिया है. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रविवार को तड़के दो मिसाइलें दागी गईं जिसमें से एक ने प्रधानमंत्री कार्यालय को नष्ट कर दिया. उस समय हमास की सरकार का नेतृत्व कर रहे हानिया वहाँ मौजूद नहीं थे. एक हफ़्ते पहले एक इसराइली सैनिक के अपहरण के बाद से इसराइल ने गज़ा क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई शुरु की है. इसराइल मानता है कि सैनिक के अपहरण के लिए हमास के नेतृत्व वाली सरकार और वे ख़ुद ज़िम्मेदार हैं. जिस बिल्डिंग पर हमला हुआ है वह हमास के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल का कार्यालय है. दक्षिण की ओर से हुए इस हमले में एक मिसाइल दूसरी मंज़िल पर स्थित प्रधानमंत्री हानिया के दफ़्तर में दाग़ी गई. इससे प्रधानमंत्री का कार्यालय नष्ट हो गया और बिल्डिंग में आग लग गई. निशाना बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्सटन का कहना है कि इस हमले से इसराइल में एक बड़ा संदेश दिया है. दूसरी ओर विस्फोट के बाद घटनास्थल पर पहुँचे इस्माइल हानिया ने कहा, "उन्होंने फ़लस्तीनी जनता के प्रतीक को निशाना बनाया." "हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अरब लीग से कहा है कि वे हमारी जनता की ज़िम्मेदारी लें और इस सैन्य कार्रवाई को रोकने का प्रयास करें." इससे पहले इसराइली सेना ने गुरुवार को फ़लस्तीनी प्रशासन के गृहमंत्रालय पर हमला किया था. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मंत्रियों के घरों पर हमले से साफ़ है कि इसराइल, उन्हें सैनिक के अपहरण के लिए सीधे दोषी मानता है. इससे पहले इसराइली सेना ने कई मंत्रियों और हमास के नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था. विश्लेषकों का कहना है कि अपहरण की इस घटना के बाद इसराइल की कार्रवाई से लगता है कि वह इस बहाने से हमास की सरकार को कमज़ोर करने में लगी हुई है. लेकिन फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रधानमंत्री हानिया ने कहा, "मंत्रियों को पकड़ा जा सकता है, वे मारे जा सकते हैं. लेकिन फ़लस्तीनी झंडा लहराता रहेगा." उम्मीद इन हमलों से पहले बात करते हुए फ़लस्तीनी नेता और राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि उन्हें अभी भी उम्मीद है कि इस मसले का शांतिपूर्ण हल निकल आएगा.
उन्होंने कहा कि बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. अब्बास ने कहा कि लेकिन उनकी भी उम्मीद की एक सीमा है. उल्लेखनीय है कि इसराइली सैनिक का अपहरण करने वाले चरमपंथी गुटों की माँग है कि इसराइसी जेलों में बंद कम से कम एक हज़ार सैनिकों को छोड़ दिया जाए और सैन्य कार्रवाई बंद कर दी जाए. लेकिन इसराइल इसके लिए तैयार नहीं है. इस बीच मिस्र से आए मध्यस्थ मामले को सुलझाने में असफल रहे. उन्होंने मान लिया है कि अब इस बारे में वे कुछ नहीं कर सकते. | इससे जुड़ी ख़बरें चरमपंथी गुटों ने नई माँगे रखीं01 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना संकट सुलझाने के लिए मिस्र की पहल01 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना गज़ा में इसराइल की बड़ी सैनिक कार्रवाई01 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 'अभियान सरकार को गिराने की साजिश'30 जून, 2006 | पहला पन्ना इसराइली सेना ने फ़लस्तीनी मंत्री पकड़े29 जून, 2006 | पहला पन्ना कूटनीति को एक मौक़ा देने की अपील27 जून, 2006 | पहला पन्ना सूचना के बदले चरमपंथी गुटों की मांग26 जून, 2006 | पहला पन्ना सैनिक की रिहाई है प्राथमिकता: इसराइल 25 जून, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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