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ग़ज़ा अभियान की आलोचना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्विट्ज़रलैंड ने कहा है कि एक इसराइली सैनिक के अगवा होने के बाद चलाए गए ग़ज़ा अभियान की परिधि में फ़लस्तीनियों को सामूहिक तौर पर लाकर इसराइल ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून तोड़ा है. स्विट्ज़रलैंड के इस वक्तव्य में इसराइली बलों के कई कामों को सूचीबद्ध किया गया है. इनमें बिजली घर को नष्ट करना और फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री के कार्यालय पर हमला करना शामिल है. स्विट्ज़रलैंड की सरकार का कहना है कि इसे किसी भी तरह न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता. स्विट्ज़रलैंड के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि जिनीवा समझौता अंतरराष्ट्रीय क़ानून का आदर करने का प्रोत्साहन देता है जो स्विट्ज़रलैंड की विदेश नीति का घोषित उद्देश्य है. हालांकि वक्तव्य में ये ज़रूर कहा गया है कि इसराइल ने अपनी कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित करने की कोशिश ज़रूर की है कि आम फ़लस्तीनी नागरिकों को किसी तरह की क्षति न पहुँचे. प्रतिक्रिया बीबीसी संवाददाता का कहना है कि आमतौर पर स्विट्ज़रलैंड राजनीतिक विवादों में नहीं उलझता लेकिन इस वक्तव्य से इसराइल और अमरीका की त्योरियां ज़रूर चढ़ेंगी. वैसे ये पहली बार नहीं है जब कि स्विट्ज़रलैंड ने मध्य पूर्व की राजनीति में दख़ल दिया हो. इस साल के आरंभ में स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रपति ने यह कहकर इसराइल को नाराज़ कर दिया था कि फ़लस्तीनी प्रशासन को अंतरराष्ट्रीय अनुदान देना बंद करना एक भूल थी. उन्होने कहा था कि हमास की नई सरकार को यह साबित करने का वक्त दिया जाना चाहिए था कि वह ठीक से काम कर सकती है या नहीं. लेकिन स्विट्ज़रलैंड के नए वक्तव्य से सहायता एजेंसियाँ ज़रूर ख़ुश होंगी क्योंकि वो ग़ज़ा में बिगड़ती मानवीय स्थिति को लेकर काफ़ी चिंतित हैं. संयुक्त राष्ट्र की बाल कल्याण संस्था यूनिसेफ़ ने छोटे बच्चों में तनाव और सदमे का स्तर काफ़ी ऊँचा पाया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ज़रूरी दवाएँ और चिकित्सा सामग्री की कमी होती जा रही है और आवाजाही पर लगी पाबंदियों के कारण डॉक्टरों और नर्सों को काम पर पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें अगवा किया गया 'सैनिक जीवित है'04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइल ने समयसीमा ठुकराई03 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइल को मंगलवार तक का समय03 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना चरमपंथी गुटों ने नई माँगे रखीं01 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइली सेना ने फ़लस्तीनी मंत्री पकड़े29 जून, 2006 | पहला पन्ना इसराइली सेना उत्तरी गज़ा में भी29 जून, 2006 | पहला पन्ना हमास और ख़ालिद मशाल की मुश्किल28 जून, 2006 | पहला पन्ना इसराइल की ख़तरनाक कार्रवाई की धमकी28 जून, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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