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कामगार हैं एड्स के सबसे बड़े शिकार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर में एड्स की महामारी का असर जानने के लिए किए गए शोध से पता चलता है कि कामगार इसके सबसे बड़े शिकार हैं. इसके चलते एड्स से बहुत अधिक प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्था पर नुक़सान हो रहा है. इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (आईएलओ) का कहना है कि वर्ष 2005 में एड्स ने ऐसे पैंतीस लाख लोगों की जान ले ली जिनकी उम्र अभी काम करने की थी. आईएलओ का कहना है कि इस संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और वर्ष 2020 तक यह संख्या 45 लाख पहुँच जाने की आशंका है. संस्था का कहना है कि एड्स की जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद मौतों का सिलसिला रुक नहीं रहा है. विश्व एड्स दिवस पर जारी अपनी एक रिपोर्ट में आईएलओ ने कहा है कि एड्स से निपटने के लिए आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है और अफ़्रीकी देश इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे. आईएलओ ने वर्ष 2006 में 43 देशों का सर्वेक्षण किया और पाया कि एड्स से बुरी तरह पीड़ित देशों का अर्थिक विकास 1992 से 2004 के बीच 0.5 प्रतिशत की दर से घटा. उल्लेखनीय है कि एड्स का पहला मामला 25 वर्ष पहले सामने आया था. राजनीतिज्ञों को ज़िम्मेदारी उधर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने लोगों से अपील की है कि किसी भी देश में एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए राजनीतिज्ञों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि इस बीमारी को लेकर खुली और व्यापक बातचीत होनी चाहिए. उन्होंने न्यूयॉर्क में कहा कि इस बीमारी ने अब तक ढाई करोड़ लोगों की जान ले ली है और चार करोड़ लोग इससे पीड़ित हैं और इस पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने संतोष जताया कि पिछले एक दशक में इस बीमारी को लेकर लोगों के रुख़ में बदलाव आया है. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार उन्होंने कहा, "एड्स से निपटने के लिए जितनी आर्थिक मदद का वादा किया गया, उतना पहले कभी नहीं किया गया और लोगों को जीवन रक्षक दवाएँ जिस तरह मिल रही हैं वैसी पहले नहीं थी और कई देश इस बीमारी से जिस तरह निपटने की कोशिश कर रहे हैं, वैसी कोशिश पहले नहीं हुई." कोफ़ी अन्नान का कहना था कि इस बार एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई की मूल भावना होनी चाहिए, जवाबदेही. उनका कहना था कि हर राष्ट्रपति और हर प्रधानमंत्री, हर सांसद और हर राजनीतिज्ञ को घोषणा करनी होगी, "मैं रोकूंगा एड्स को." संसाधनों की कमी दूसरी ओर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में एड्स के विस्तार पर चिंता जताई है और कहा है कि विभिन्न प्रयासों के बावजूद एचआईवी और एड्स फैलता जा रहा है और इस दिशा में तत्काल क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यवाहक महानिदेशक डॉक्टर एंडर्स नॉर्डस्ट्रॉम का कहना है कि इसके लिए धन, दवाएँ और समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकता है. इससे प्रभावित लोगों की संख्या पूर्वी और मध्य एशियाई और पूर्वी यूरोपीय देशों में बढ़ती जा रही है. दक्षिण अफ़्रीका शुक्रवार को एड्स से निपटने के पाँच साल के एक कार्यक्रम की घोषणा करने जा रहा है. दक्षिण अफ़्रीका में एचआईवी और एड्स से लगभग 55 लाख लोग प्रभावित हैं और प्रतिदिन वहाँ लगभग 900 लोगों की इसकी वजह से मौत हो जाती है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'एड्स फैल रहा है और संसाधन हैं कम' 30 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना एचआईवी-एड्स पर बिल क्लिंटन की पहल30 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस एड्स के प्रसार पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी02 जून, 2005 | पहला पन्ना भारत में एड्स के ख़िलाफ़ संयुक्त मुहिम23 जून, 2006 | भारत और पड़ोस एशियाई देशों में एड्स की भयावह तस्वीर01 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना एड्सःउत्तर भारत पर ध्यान ज़रूरी07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस ख़तना से एड्स पर अंकुश13 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 'एड्स से हर मिनट एक बच्चे की मौत'25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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