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'अफ़्रीका में स्वास्थ्य की स्थिति बदतर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि की अफ़्रीकी देशों में स्वास्थ्य की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया के जिन 20 देशों में प्रसव के दौरान सबसे ज़्यादा महिलाओं की मृत्यू होती है, उनमें से उन्नीस देश अफ़्रीका में हैं. चिंताजनक बात ये है कि ये संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. यह रिपोर्ट कहती है कि डायबिटीज़ जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया भर में सामने आने वाले मलेरिया के मामलों में से 90 फ़ीसदी अफ़्रीका में ही सामने आते हैं. दुनिया की कुल आबादी का 10 फ़ीसदी से कुछ ज़्यादा हिस्सा अफ़्रीकी देशों में रहता है. जबकि एचआईवी या एड्स से पीड़ित लोगों में से 60 फ़ीसदी अफ़्रीकी देशों के होते हैं. लेकिन इस रिपोर्ट में कुछ राहत के भी संकेत हैं. अब अफ़्रीकी देशों में एचआईवी से पीड़ित उन लोगों की संख्या में आठ गुना बढ़ोत्तरी हुई जिनके पास इस बीमारी से लड़ने के लिए ज़रूरी दवाएँ उपलब्ध हैं. अध्ययन डब्लूएचओ ने पहली बार पूरे अफ़्रीकी देशों में स्वास्थ्य की स्थिति का विस्तार से अध्ययन किया है. डब्लूएचओ ने इस रिपोर्ट में अफ़्रीकी सरकारों को चेतावनी दी हैं कि अगर उन्हें ग़रीबी दूर कर विकास की राह पर आगे बढ़ना है तो स्वास्थय के स्तर को सुधारने के लिए निवेश करना होगा. साथ ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को प्रशिक्षण देकर इस दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा. डब्लूएचओ के अफ़्रीका में क्षेत्रीय निदेशक लुईस गोम्स साम्बो ने कहा, "अगर हमें आगे बढ़ते रहना है तो अफ़्रीकी सरकारों और उनके सहयोगियों को दृढ़संकल्प के साथ काम करना होगा और स्वास्थ्य सेवाओं को और मज़बूत करने के लिए निवेश करना होगा." अफ़्रीका में पैदा होने वाले हर एक लाख बच्चों में से 910 मामलों में जन्म देने वाली माँ की मौत हो जाती है. 1990 में यह संख्या 870 थी. संयुक्त राष्ट्र ने अपने सहस्राब्दि विकास लक्ष्य में वर्ष 2015 तक इस संख्या को घटाकर 228 करने की बात कही है. रिपोर्ट में इन समस्याओं को सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी बताया गया है. माली में प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु की संख्या कम करने के लिए समाज के कई वर्गों ने मिलकर 35 स्वास्थ्य केंद्र बनाए हैं. इनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों की स्वास्थ्य सेवाओं से हज़ारों स्थानीय महिलाओं को प्रसव के दौरान होने वाली समस्याओं से राहत मिल रही है. यूगांडा में प्रशिक्षित नर्स डॉक्टरों की तरह एचआईवी या एड्स से पीड़ित मरीज़ो को जीवन रक्षक दवाएँ दे रही हैं. बोत्स्वाना की स्वास्थ्य मंत्री शीला लोऊ ने कहा कि उनके देश के तीन लाख एचआईवी मरीज़ो में से 75 हज़ार को आसानी से दवाएँ उपलब्ध हैं. दक्षिण अफ़्रीका में युवा डॉक्टरों और मेडिकल छात्र एक रेलगाड़ी से देश के दूर-दराज़ इलाक़ों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचा रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें जलवायु परिवर्तन से 'अफ़्रीका में संकट'29 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान टीबी से निपटने में बिल गेट्स की पहल27 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना नाइज़ीरिया में बर्ड फ़्लू को लेकर चिंता09 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना टीकाकरण का बड़ा यूरोपीय अभियान09 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना अफ़्रीका में सहायता राशि बढ़ाने की मांग11 मार्च, 2005 | पहला पन्ना अफ़्रीकी देशों में एचआईवी पर चेतावनी04 मार्च, 2005 | पहला पन्ना नशीली दवाओं की चपेट में अफ़्रीकी देश02 मार्च, 2005 | पहला पन्ना भुखमरी से मौत की संख्या में बढ़ोत्तरी09 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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