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भुखमरी से मौत की संख्या में बढ़ोत्तरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भूख और कुपोषण के कारण हर साल दुनियाभर में क़रीब 50 लाख बच्चों की मौत हो जाती है. रोम में जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र खाद्द और कृषि संगठन ने कहा है दुनिया भूख के ख़िलाफ़ अपनी जंग हार रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2001 से 2002 के बीच दुनिया में 85 करोड़ से भी ज़्यादा लोग कुपोषण के शिकार हुए और ये संख्या लगातार बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की खाद्द एजेंसी के अनुसार सिर्फ़ विकासशील देशों में ही 81 करोड़ से भी ज़्यादा लोग कुपोषण के शिकार हैं और ये संख्या लगातार बढ़ रही है. एजेंसी ने कहा है कि आठ साल पहले वादा किया गया था कि वर्ष 2015 तक इस संख्या को आधा कर दिया जाएगा. लेकिन इस दिशा में कम ही प्रगति हो पा रही है. लक्ष्य हालाँकि एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि यह लक्ष्य अभी भी हासिल किया जा सकता है. रिपोर्ट में धनी देशों से अपील की गई है कि भुखमरी ख़त्म करने के लिए वे अपनी ओर से ज़्यादा कोशिश करें.
संयुक्त राष्ट्र खाद्द और कृषि संगठन के सहायक महानिदेशक ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भूख से लड़ने के आर्थिक फ़ायदे को समझ नहीं पाया है. इस रिपोर्ट में दुनिया के उन इलाक़ों का जिक्र किया गया है जहाँ सबसे ज़्यादा लोग भूख और कुपोषण के शिकार हैं. दुनियाभर में 35 देश ऐसे हैं जहाँ सबसे ज़्यादा खाने की कमी हैं और इनमें से ज़्यादातर देश अफ़्रीका में हैं. लेकिन चीन और भारत में ख़राब होती स्थिति ने भी इस समस्या में योगदान दिया है. इस रिपोर्ट में एक ख़ास बात को उजागर किया गया है कि कुपोषण की समस्या सिर्फ़ विकासशील देशों तक ही सीमित नहीं है. औद्योगिक रूप से संपन्न कहे जाने वाले देशों में भी यह संख्या 90 लाख तक पहुँच गई है. |
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