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टीकाकरण का बड़ा यूरोपीय अभियान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन ने विकासशील देशों के बच्चों के टीकाकरण के लिए एक बड़ी योजना की घोषणा की है. इस योजना से विकासशील देशों के लाखों बच्चों को खसरा, पोलियो, हेपेटाइटिस, टेटनस और डिप्थिरिया जैसी बीमारियों से बचाया जा सकेगा. इन बीमारियों से दुनिया भर में हर वर्ष लाखों बच्चे मारे जाते हैं जबकि टीका लगाकर इनकी रोकथाम करना बहुत मुश्किल काम नहीं है. इस योजना पर अमल के लिए ब्रिटेन ने इस योजना के लिए एक तिहाई धन लगाने का फ़ैसला किया है जबकि फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे यूरोपीय देश भी सहयोग कर रहे हैं. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स इस योजना के लिए अगले दस वर्षों में 75 करोड़ डॉलर का वादा कर चुके हैं. आकलन किया गया है कि दस वर्ष बाद जब यह योजना पूरी हो जाएगी तो लगभग एक करोड़ बच्चों का जीवन बचाया जा सकेगा. गॉर्डन ब्राउन ने कहा, "विज्ञान ने जब इतनी प्रगति की है तो दुनिया के हर कोने में उसका लाभ पहुँचना चाहिए, हमारा लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर टीकाकरण करने का है." विरोध भी सिद्धांत के तौर पर तो हर कोई इस योजना का समर्थन कर रहा है लेकिन इसके आर्थिक पक्ष का विरोध भी हो रहा है. वर्ल्ड डेवलपमेंट मूवमेंट के पीटर हार्डस्टाफ़ ने कहा कि वे टीकाकरण के लिए धन जुटाने के समर्थक तो हैं लेकिन इस योजना से ख़ुश नहीं हैं. उन्होंने कहा, "हमारी चिंता यही है कि जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय वित्त बाज़ार से पैसा जुटाया जा रहा है, आने वाले वर्षों में सारा धन तो उसका ब्याज चुकाने में चला जाएगा, गरीबों की मदद कहाँ से होगी." पीटर हार्डस्टाफ़ का कहना है कि सबसे अच्छा तो यही होता कि सरकार अपने धन से इस योजना को चलाती. वैक्सीन फंड बोर्ड की अध्यक्ष ने कहा कि अमरीका भी इस योजना में मदद करे तो अच्छा रहेगा लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति बुश पहले ही कह चुके हैं कि यह योजना 'अमरीकी बजट प्रावधानों के अनुरूप नहीं है' इसलिए अमरीका मदद नहीं कर सकता. |
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