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अफ़्रीका में सहायता राशि बढ़ाने की मांग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़्रीका पर ब्रिटेन की अगुआई में गठित आयोग ने धनी देशों से अपील की है कि वे अफ़्रीकी देशों में अपनी सहायता राशि दोगुनी करें. आयोग का कहना है कि हर साल सहायता राशि में 50 अरब डॉलर की बढ़ोतरी होनी चाहिए और ऐसा 10 सालों तक चलना चाहिए. आयोग की आख़िरी रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़्रीकी नेताओं को अपने देशों में भ्रष्टाचार को ख़त्म करके अच्छा शासन देने की कोशिश करनी चाहिए. ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि अफ़्रीकी देशों से ग़रीबी उन्मूलन उनकी पीढ़ी की सबसे बड़ी चुनौती है. राजधानी लंदन में रिपोर्ट जारी करते हुए ब्लेयर ने कहा, "अफ़्रीकी देशों में अच्छाई के लिए बदलाव हो सकते हैं और इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बदलाव कैसे होंगे." उन्होंने कहा कि इस समय अफ़्रीकी देशों से पलायन कर रहे लाखों लोगों के लिए कोई तर्क नहीं दिया जा सकता. सिफ़ारिश ब्रितानी प्रधानमंत्री ब्लेयर ने ही फरवरी 2004 में इस आयोग का गठन किया था जिसमें कई अफ़्रीकी नेता और गायक बॉब गेल्डॉफ़ भी शामिल थे. उन्होंने वादा किया था कि आयोग की रिपोर्ट में दी जाने वाली सिफ़ारिशों के आधार पर वे सरकार की नीति में भी बदलाव करेंगे. रॉक स्टार बॉब गेल्डॉफ़ ने भी धनी देशों से आग्रह किया कि वे कुछ प्रभावशाली क़दम उठाए नहीं तो उन्हें शर्मिंदा होना पड़ेगा. 400 पृष्ठ की इस रिपोर्ट की जो सिफ़ारिशें की गईं हैं, उनमें प्रमुख है- अफ़्रीक़ी देशों के ऋण माफ़ करना, चिकित्सा पर ज़्यादा ख़र्च करना, ख़ासकर एड्स जैसी बीमारियों पर, प्राइमरी स्कूल की पढ़ाई मुफ़्त मुहैया कराना. रिपोर्ट में ये भी सिफ़ारिश की गई है कि पश्चिमी देशों को अफ़्रीक़ा के संकटग्रस्त देशों को हथियारों की बिक्री बंद करनी चाहिए. |
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