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नशीली दवाओं की चपेट में अफ़्रीकी देश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की ड्रग एजेंसी ने कहा है कि अफ़्रीका में हेरोइन जैसी ग़ैर क़ानूनी नशीली दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है. एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो एचआईवी-एड्स संकट और गहरा जाएगा. अपनी वार्षिक रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि नशीली दवाओं की तस्करी और इसके दुरुपयोग की घटनाएँ कई अफ़्रीकी देशों के लिए समस्या बनतीं जा रहीं हैं. बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि ऐसी नशीली दवाओं की तस्करी के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है. बोर्ड ने अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम के उत्पादन पर कोई प्रभावी नियंत्रण न लग पाने पर भी चिंता जताई है. ख़तरा बोर्ड का कहना है कि पूर्वी और दक्षिणी अफ़्रीका के देशों में ऐसी तस्करी तेज़ी से फैल रही है और इससे एड्स फैलने का ख़तरा और बढ़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके सबूत हैं कि अफ़्रीका के कुछ देशों में चल रहे गृह युद्ध में नशीली दवाओं की तस्करी का पैसा लगा है. रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वह अफ़्रीकी देशों को इस समस्या से निपटने में मदद दे. बोर्ड ने कई नशीली दवाओं के इंटरनेट पर बेचे जाने की बात भी कही. रिपोर्ट में संबंधित देशों से अपील की गई है कि वह इससे निपटने के लिए प्रभावी क़दम उठाएँ. रिपोर्ट में अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम के व्यापार पर चिंता जताई गई है और कहा गया है कि इससे देश की शांति व्यवस्था को ख़तरा पैदा हो सकता है. |
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