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बुधवार, 04 अक्तूबर, 2006 को 17:12 GMT तक के समाचार
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महमूद अब्बास को अमरीकी समर्थन
कोंडोलीज़ा राइस और महमूद अब्बास
राइस ने उदार अरब देशों से महमूद अब्बास का समर्थन करने का अनुरोध किया है
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने फ़लस्तीनी प्रशासन के अध्यक्ष महमूद अब्बास को अमरीकी समर्थन जताते हुए उनके नेतृत्व की प्रशंसा की है.

कोंडोलीज़ा राइस ने बुधवार को फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट के शहर रामल्ला में फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास से मुलाक़ात की.

महमूद अब्बास से मुलाक़ात के बाद कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि अमरीका महमूद अब्बास के नेतृत्व की "बहुत प्रशंसा" करता है.

रामल्ला में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कोंडोलीज़ा राइस ने इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष के समाधान के दो राष्ट्रों के विकल्प को अमरीकी समर्थन एक बार फिर दोहराया.

राइस ने महमूद अब्बास से कहा, "इस मक़सद के लिए आपको अमरीका का समर्थन हासिल है और निजी रूप से मेरा समर्थन भी और राष्ट्रपति का निजी समर्थन भी."

कोंडोलीज़ा राइस की इस टिप्पणी से पहले महमूद अब्बास कह चुके हैं कि एक राष्ट्रीय एकता वाली फ़लस्तीनी सरकार के गठन पर बातचीत टूट चुकी है.

महमूद अब्बास ने कहा, "अब कोई बातचीत नहीं हो रही है. मैं यह भी कह चुका हूँ कि बातचीत हमेशा तो जारी नहीं रह सकती इसलिए हमें अपने फ़ैसलों और अगले क़दम के बारे में दूरदृष्टि से काम लेना होगा."

जनवरी 2006 में चुनाव जीतने के बाद से ही हमास के नेतृत्व वाली फ़लस्तीनी सरकार के सामने राजनीतिक संकट रहा है.

इसराइल के अस्तित्व को मान्यता नहीं देने और हिंसा की निंदा नहीं करने की वजह से पश्चिमी देशों ने हमास सरकार का बहिष्कार कर दिया.

फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माईल हानिया ने कोंडोलीज़ा राइस की यात्रा की आलोचना की है.

हानिया ने कहा, "राइस इस क्षेत्र को फिर से बनाने और इस तरह बनाने में रुचि रखती हैं जो अमरीकी और इसराइली हितों को पूरा करे."

शांति प्रक्रिया

कोंडोलीज़ा राइस की इस यात्रा को मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के अमरीकी प्रयासों के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.

अमरीकी और इसराइली हित...
 राइस इस क्षेत्र को फिर से बनाने और इस तरह बनाने में रुचि रखती हैं जो अमरीकी और इसराइली हितों को पूरा करे.
इस्माईल हानिया

लेकिन येरूशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता मैट प्रोजर का कहना है कि न इसराइली सरकार और न ही फ़लस्तीनी सरकार एक दूसरे के साथ बातचीत के लिए तैयार है और ऐसी बहुत कम संभावना है कि इस रुख़ में राइस के दौरे से कोई बदलाव आएगा.

वह येरूशलम में इसराइली प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट से भी मुलाक़ात करेंगी.

इससे पहले बुधवार को ही फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के समर्थकों और हमास के समर्थकों के बीच ताज़ा लड़ाई होने की ख़बरें हैं जिसमें कम से कम दस लोग मारे गए हैं और 100 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

बीबीसी संवाददाता जोनाथन बीयल कोंडोलीज़ा राइस के साथ यात्रा कर रहे हैं और उनका कहना है कि राइस ने अतिवादी ताक़तों के ख़िलाफ़ समर्थन जुटाने के लिए "उदार अरब देशों" के साथ दो दिन तक बातचीत की.

राइस ने अमरीका के सहयोगी अरब देशों से अनुरोध किया कि वे फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को सहयोग दें.

समझा जाता है कि उन अरब देसों ने कोंडोलीज़ा राइस को संदेश दिया कि अमरीका को अरब-इसराइल संकट सुलझाने के लिए और ज़्यादा प्रयास करने की ज़रूरत है क्योंकि उनके ख़याल में क्षेत्र में अस्थिरता की वजह यही संघर्ष है.

अमरीकी विदेश मंत्री ने रुकी पड़ी मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की इच्छा भी ज़ाहिर की लेकिन उनकी यह कोशिश शुरू होने से पहले ही दो फ़लस्तीनी गुटों में हिंसक संघर्ष हुआ.

कोंडोलीज़ा राइस ने इस लड़ाई की निंदा की. राइस ने हमास सरकार पर यह भी आरोप लगाया है कि वह फ़लस्तीनी लोगों के लिए काम करने में नाकाम रही है और बाहरी दुनिया के साथ भी ज़िम्मेदारी भरा बर्ताव करने में नाकाम रही है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हमास सरकार की कड़ी निंदा से अलग राइस ने ऐसे कोई ठोस संकेत नहीं दिए हैं कि उनके पास हिंसा को रुकवाने की कोई ठोस योजना है, शांति प्रक्रिया फिर से शुरू करना तो अलग है.

ग़ौरतलब है कि अमरीका हमास सरकार के साथ अब भी कोई संबंध बनाने से इनकार करता रहा है.

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