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शनिवार, 16 सितंबर, 2006 को 03:34 GMT तक के समाचार
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आतंकवाद पर स्पष्ट रुख़ अपनाएँ: मनमोहन
मनमोहन सिंह
कट्टरपंथियों को गंभीर समस्याओं से ध्यान हटाने नहीं दे सकते: मनमोहन
गुटनिरपेक्ष आंदोलन की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि यदि गुटनिरपेक्ष देश 'आतंकवाद पर स्पष्ट रवैया नहीं अपनाते हैं तो आज के समय में गुटनिरपेक्ष आंदोलन की कोई प्रासंगिकता नहीं रह जाएगी.'

क्यूबा की राजधानी हवाना में 50 से ज़्यादा राष्ट्राध्याक्षों और अन्य अनेक देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बड़े मुद्दों के समाधान की बात के साथ, असहिष्णुता और कट्टरपंथ फैलाने वाली ताकतों पर वार किया और उदारवाद की ज़रूरत पर बल दिया.

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "अगर हम गुटनिरपेक्ष आंदोलन में दोबारा जान डालना चाहते हैं तो सम्मेलन का एकजुटता से संदेश यही जाना चाहिए कि आतंकवाद समेत दुनिया भर के बड़े मुद्दों के तुरंत समाधान की ज़रूरत है."

 हम असहिष्णुता और कट्टरपंथ की ताकतों को अपने लोगों की ग़रीबी, बीमारी और अज्ञानता जैसी गंभीर समस्याओं से ध्यान हटाने की इजाज़त नहीं दे सकते
मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था, "हम असहिष्णुता और कट्टरपंथ की ताकतों को अपने लोगों की ग़रीबी, बीमारी और अज्ञानता जैसी गंभीर समस्याओं से ध्यान हटाने की इजाज़त नहीं दे सकते. फिर ये समस्या चाहे आतंकवाद की हो, महामारी की, ऊर्जा सुरक्षा की या फिर पर्यावरण की."

उन्होंने कहा, "हम सब ने उग्र नीतियों को नकार दिया है, तो फिर हमें साथ मिलकर महात्मा गाँधी का संदेश दुनिया में फैलाना चाहिए."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था, "हमारी आवाज़ उदारवाद, अनुरूपता और वादानुवाद की आवाज़ होनी चाहिए और यदि दुनिया के आधे से ज़्यादा लोगों की यही आवाज़ होगी, तो दुनिया में उन्हीं की बात मानी जाएगी."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल में लेबनान में चले संघर्ष को दुखद और निर्रथक युद्ध बताते हुए कहा कि वहाँ लोगों में अलग-थलग पड़ने की भावना बढ़ी है. उनका कहना था कि गुटनिरपेक्ष देशों को एक उच्चस्तरीय ग्रप बनाकर मध्यपूर्व में स्थायी शांति के प्रयासों में मदद करनी चाहिए.

विश्व में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पहले भी संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय एजेंडा तय करने में अहम भूमिका निभाई है और उसे ये दोबारा करना होगा. संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की बात करते हुए उन्होंने कहा विकासशील देशों को सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की सूची में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

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