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कश्मीरी नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीर के बारे में परवेज़ मुशर्रफ़ के ताज़ा बयान पर कश्मीर के विभिन्न नेताओं ने विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएँ दी हैं. जहाँ जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने इसे गंभीर मुद्दा मानने से इनकार कर दिया वहीं विपक्षी नेता महबूबा मुफ़्ती ने आशा जताई कि भारत सरकार इसके लिए तैयार हो जाएगी. वहीं कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने इस बारे में अलग-अलग टिप्पणी की. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक भारतीय टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में जम्मू कश्मीर के तीन शहरों से सेना हटाने की बात कही थी. इस पर भारत सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई थी और कहा था कि भारत की भूमि पर सैनिक हटाने या कही दोबारा तैनात करने का फ़ैसला उसका अपना है. इस बारे में कोई विदेशी ताकत या सरकार उसे हुक्म नहीं दे सकती है. प्रतिक्रियाएँ जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के भारत प्रशासित कश्मीर के तीन शहरों से सेना हटाने के प्रस्ताव को गंभीर मुद्दा नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की समस्या सीमा पार से चरमपंथ की है और सैनिकों के हटाने से समस्या के समाधान में कोई मदद नहीं मिलेगी बल्कि वह और गंभीर होगी. हैदराबाद में प्रवासी भारतीय दिवस में हिस्सा लेने आए गुलाम नबी आज़ाद ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा,"जम्मू कश्मीर की असली समस्या सीमा पार से चरमपंथ की है इसलिए ऐसे अगंभीर मुद्दे से कोई मदद नहीं मिलेगी." वहीं प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत सरकार जम्मू कश्मीर से सेना को हटा लेगी. महबूबा मुफ़्ती ने कहा,"समय आ गया है कि भारत सरकार कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा के काम से सेना को पीछे हटा ले". वहीं हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के उदारवादी गुट के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने मुशर्रफ़ के प्रस्ताव की सराहना की और कहा कि भारत को आगे आना होगा. उमर फ़ारूक़ ने कहा,"शुरूआत तो भारत को ही करनी पड़ेगी और अगर कोई ऐसी सूरत बनती है तो हुर्रियत भी और पाकिस्तान भी इसमें भरपूर मदद करेगा." उधर एक और वरिष्ठ अलगाववादी नेता, डेमोक्रेटिक फ़्रीडम पार्टी के नेता शबीर शाह ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को एकबारगी नकार देने के लिए भारत की निंदा की. वहीं एक और अलगाववादी पार्टी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट, जेकेएलएफ़ के नेता यासीन मलिक ने ना तो मुशर्रफ़ के बयान पर कुछ कहना चाहा ना ही भारत के रवैये पर कोई टिप्पणी दी. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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