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सीमा पर संघर्ष विराम के दो साल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर में सीमा रेखा पर दो साल पहले हुए संघर्ष विराम की दोनों के रिश्ते सुधारने में अहम भूमिका रही है. दोनों ही देशों के लिए अच्छा माने जाने वाले इस संघर्ष विराम का अब तीसरा वर्ष शुरू हो गया है. जम्मू क्षेत्र में नगरौटा स्थित सेना की सोलहवीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल सुधीर शर्मा कहते हैं कि भारतीय सेना इस संघर्ष विराम को मज़बूती से आगे बढ़ाना चाहती है. ग़ौरतलब है कि यह संघर्ष विराम लागू होने से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर एक अलग दृश्य होता था. सीमावर्ती क्षेत्र में पहुँचते ही हर तरफ़ माहौल में तनाव झलकता था. बस यही डर होता था कि न जाने कब कहाँ से गोलियाँ बरस जाएँगी. जम्मू कश्मीर में दोनों देशों के बीच लगभग 200 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा और 720 किलोमीटर नियंत्रण रेखा पर कहीं न कहीं गोलीबारी चलती रहती थी और इससे भारी नुक़सान होता था. सबसे अहम था कि सीमा पर चलती हर एक गोली दोनों देशों के बीच अविश्वास और दूरियों को और बढ़ा देती थी. संघर्ष विराम पर 16 वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल सुधीर शर्मा का कहना था कि सबसे अधिक फ़ायदा उन लोगों को हुआ है जो सीमा और नियंत्रण रेखा के पास में रहते हैं. दोनों को लाभ पर संघर्ष विराम से से दोनों देशों के सुरक्षा बलों को भी काफ़ी फ़ायदा हुआ है और अब वे प्रशिक्षण और विकास पर ज़्यादा ध्यान दे पा रहे हैं.
जनरल सुधीर शर्मा का मानना है, "सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के आचरण में संघर्ष विराम के कारण परिपक्वता आई है.'' संघर्ष विराम से निस्संदेह अगर सबसे अधिक किसी को लाभ हुआ है तो वो है सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग. जनरल शर्मा का कहना है, ''इससे सीमा के पास रह रहे दोनों तरफ के लोगों के जीवन में सुधार आया है.'' उनका कहना है, ''बच्चे स्कूल जाते हैं क्योंकि फ़ायरिंग के दौरान माता-पिता डर की वजह से बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे. अब खेती हो रही है, लोग पक्के घर बना रहे हैं और गोली का डर ख]त्म हो गया है.'' एक सीमावर्ती स्कूल की अध्यापिका सविता देवी का भी मानना है,''अब सब कुछ ठीक है. गोलीबारी के दिनों में जब सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त था तब सीमावर्ती गाँवों में बाक़ी चीज़ों के साथ-साथ शादी विवाह और त्योहारों की रस्में भी प्रभावित होती थीं.'' दो वर्ष से सीमा पर अब शादियाँ भी सामान्य हो रही हैं. कोरोथाना गाँव के रंजीत कुमार के भाई की शादी काफी धूमधाम से हो रही है, परंतु उन्हें याद आ रहा है वो समय, जब गोलीबारी के दिनों में उसकी बहन की शादी थी. "तब बारात तो दो किलोमीटर पीछे ही रुक गई थी और कुछ ही लोग आगे यहाँ पहुँचे. खाना परोसते ही गोलियाँ चलनी शुरू हो गईं और सब लोगों को भागना पड़ा था." रंजीत यह भी बताते हैं कि सीमा के पास रह रहे लड़कों को शादी के लिए लड़कियाँ भी मुश्किल से मिलती थीं क्योंकि यहाँ सीमा पर गोलियों के डर के कारण कोई भी अपनी लड़की का विवाह नहीं करना चाहता था. अब लोगों के मन में यह भय भी है कि कहीं यह संघर्ष विराम ख़त्म न हो जाए. परंतु जनरल शर्मा मानते हैं, ''संघर्ष विराम ख़त्म होने का कोई कारण अभी नज़र नहीं आ रहा बल्कि भारतीय सेना इसे मज़बूती से आगे बढ़ाना चाहती है.'' | इससे जुड़ी ख़बरें 'भारत-पाक सहयोग को बढ़ावा दें'18 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर का हल हमेशा के लिए हो जाए'19 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सीआरपीएफ शिविर पर हमला, पाँच मरे23 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस कलाम भूकंप प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर26 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नियंत्रण रेखा पार करने का सिलसिला शुरु19 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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