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शनिवार, 02 सितंबर, 2006 को 15:45 GMT तक के समाचार
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भारत-पाकिस्तान के 14 शियाओं की हत्या
करबला
करबला में इमाम हुसैन की पवित्र दरगाह है
इराक़ी शहर करबला के निकट हुए एक हमले में भारत और पाकिस्तान के 14 शिया श्रद्धालु मारे गए हैं. मारे गए श्रद्धालुओं में 11 पाकिस्तान के और तीन भारत के हैं.

इराक़ी पुलिस के मुताबिक़ इन शिया श्रद्धालुओं को उनके बस से उतारा गया और फिर गोली मार दी गई. ये सभी श्रद्धालु अंबर प्रांत से होकर रवाना हो रहे थे.

इराक़ी पुलिस का कहना है कि ये घटना रमादी के पश्चिम 160 किलोमीटर दूर एक सर्विस स्टेशन के पास हुई. रमादी में हाल के दिनों में हिंसा की कई घटनाएँ हुई हैं.

पाकिस्तानी और भारतीय शिया श्रद्धालु करबला स्थित इमाम हुसैन की मज़ार की ओर जा रहे थे. हर साल यहाँ लाखों की संख्या में शिया श्रद्धालु आते हैं.

यह पहली बार नहीं है कि शिया श्रद्धालुओं को करबला जाते समय निशाना बनाया गया है.

इस साल अगस्त में एक और पवित्र शहर नजफ़ के पास हुए एक बम धमाके में 35 लोग मारे गए थे.

तीनों भारतीय आंध्र प्रदेश के

मारे गए तीनों भारतीय श्रद्धालु आंध्र प्रदेश के हैं. दो लोग तो हैदराबाद के ही हैं. सैयद अहमद अली चंचलगुडा में एक एसटीडी बूथ चलाते थे.

जबकि डॉक्टर मुल्ला मोहिउद्दीन घाटकेसर के रहने वाले थे और जफ़्फ़ार मशादी पूर्वी गोदावरी ज़िले मे रहते थे.

हैदराबाद से 14 सदस्यीय श्रद्धालुओं का दल ट्रेवेल ऑपरेटर सईदा ज़ैनाब की अगुआई में 23 अगस्त को रवाना हुआ था. इनकी यात्रा 45 दिनों की थी और इसी क्रम में इन्हें नज़फ़ अशरफ़ और करबला का भी दौरा करना था.

हैदराबाद लौटने से पहले इन लोगों को सऊदी अरब में उमरा भी करना था. सईदा ज़ैनाब की ओर से मिली सूचना के मुताबिक़ 27 पाकिस्तानी श्रद्धालुओं के साथ भारतीय दल ने शुक्रवार की सुबह जॉर्डन की सीमा से इराक़ में प्रवेश किया था.

लेकिन करबला से 100 किलोमीटर पहले पुलिस की वर्दी पहने चार बंदूकधारियों ने उन्हें रोक लिया. बंदूकधारियों ने सभी लोगों के पासपोर्ट और सामान छीन लिए और पुरुष श्रद्धालुओं को अलग कर दिया.

बाद में सभी पुरुष श्रद्धालुओं को गोली मार दी गई. इस घटना से हैदराबाद में काफ़ी नाराज़गी है. मारे गए लोगों में से एक सैयद अहमद अली के रिश्तेदार ने कहा, "ये आतंकवाद की अमानवीय घटना है. निर्दोष श्रद्धालुओं को मार कर कोई क्या हासिल कर लेगा."

हैदराबाद में शिया मुसलमान बड़ी संख्या में रहते हैं और हर साल यहाँ से लोग इराक़ और ईरान का दौरा करते हैं.

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