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कोठरी में हिम्मत की मिसाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आठ साल पहले ग़ायब हुई ऑस्ट्रिया की किशोर लड़की नताशा कैम्पुश का कहना है कि उसका अपहरण करने वाले व्यक्ति ने पहले एक साल तक उससे कहा था कि उसे 'मास्टर' कहकर पुकारे. नताशा बुधवार को अपने अपहर्ता वुल्फ़गैंग प्रिकलोपिल की क़ैद से भाग निकली थी जिसके बाद पुलिस से बातचीत में उसने ये बातें कही हैं. शुक्रवार को डीएनए परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि यह लड़की वही नताशा है जिसका आठ साल पहले दस वर्ष की अवस्था में अपहरण कर लिया गया था. उसका अपहरण करने वाले 44 वर्षीय वुल्फ़गैंग प्रिकलोपिल को जब यह पता चला कि नताशा उसकी क़ैद से भाग निकली है तो उसने एक रेलगाड़ी के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली. ऐसा माना जाता है कि वुल्फ़गैंग प्रिकलोपिल ने नताशा को अपने घर में बनाई एक ऐसी गुप्त कोठरी में रखा जिसमें से आवाज़ बाहर नहीं आ सकती थी. नताशा के माता-पिता ने अपने बेटी को फिर से पाकर बेतहाशा ख़ुशी ज़ाहिर की है. नताशा की माँ ने ऑस्ट्रियाई टेलीविज़न से कहा, "हमने एक दूसरे को बाँहों में भर लिया. मैंने उसे देखते ही पहचान लिया था, उसका चेहरा जाना पहचाना है, मैं हमेशा सोचती थी कि मेरी बेटी ज़िदा होगी." 'अपराधी' ऑस्ट्रियाई मीडिया के अनुसार नताशा ने पुलिस को बताया कि वह अपने अपहर्ता को 'अपराधी' मानती है. ऑस्ट्रिया के अख़बार क्रोन ज़ीतुंग के अनुसार नताशा ने कहा, "वह मेरे साथ अच्छे तरीके से पेश आता था."
ऐसी भी ख़बरें छपी हैं कि नताशा ने पुलिस को यह बताया है, "मैं उसे पहले साल मास्टर पुकारती थी." अख़बार लिखता है कि नताशा को जिस दिन अगवा किया था उस दिन उसे एक वाहन में डाल दिया गया और कहा गया, "बस चुपचाप पड़ी रहो नहीं तो तुम्हारे साथ कुछ भी हो सकता है." नताशा से बातचीत करने वाले पुलिसकर्मी ने ऑस्ट्रियाई टेलीविज़न को बताया कि अगर वुल्फ़गैंग प्रिकलोपिल उस दिन नताशा का अपहरण नहीं करता तो किसी और दिन करता यानी उसने नताशा का अपहरण करने की ठान ली थी. हिम्मत पुलिस का कहना है कि नताशा काफ़ी हिम्मतवाली लड़की है और अपहर्ता की क़ैद से भागने के बाद अब उसका बर्ताव सामान्य लग रहा है. नताशा से बातचीत करने वाले मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हो सकता है कि नताशा 'स्टॉकहोम सिंड्रोम' के प्रभाव में आ गई हो. स्टॉकहोम सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति होती है जब अगुवा होने वाले व्यक्ति को अपने अपहर्ता के साथ सहानुभूति हो जाती है. नताशा के पिता अपनी बेटी से मिलकर बस फूट-फूटकर रोने लगे. उन्होंने ऑस्ट्रियाई टेलीविज़न से कहा कि वो यह उम्मीद छोड़ ही चुके थे कि अब कभी नताशा से उनकी मुलाक़ात हो भी पाएगी. नताशा के पिता ने कहा, "उसने कहा, डैड, मैं आपसे प्यार करती हूँ और अगले ही पल उसका सवाल था - क्या मेरी खिलौना कार अब भी रखी है. वह नताशा का पसंदीदा खिलौना था. मैंने इन सालों के दौरान उसके खिलौनों को फेंका नहीं." अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि नताशा को अगुवा करने के पीछे वुल्फ़गैंग प्रिकलोपिल का क्या मक़सद था और क्या वुल्फ़गैंग प्रिकलोपिल ने नताशा का यौन शोषण किया. पुलिस का कहना है कि वुल्फ़गैंग प्रिकलोपिल का नताशा के परिवार के साथ कोई संबंध नहीं था और न ही उसने कभी फिरौती की माँग की. | इससे जुड़ी ख़बरें 48 लोगों को मारने का 'इक़बाले जुर्म'28 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना बरसों के बिछड़े माँ-बेटा मिले28 जून, 2006 | पहला पन्ना ब्रिटेन में जबरन विवाह के ख़िलाफ़ अभियान16 मार्च, 2006 | पहला पन्ना फ़िल्म ने बच्ची को बचाया08 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना जादू-टोने के मामलों से चिंता04 जून, 2005 | पहला पन्ना कुतिया ने बच्ची की जान बचाई09 मई, 2005 | पहला पन्ना शादियों के बहाने घपला25 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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