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गुरुवार, 16 मार्च, 2006 को 13:26 GMT तक के समाचार
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ब्रिटेन में जबरन विवाह के ख़िलाफ़ अभियान
प्रचार अभियान में इस्तेमाल होने वाला एक पोस्टर
ब्रिटेन के कई मंत्री और जानी-मानी एशियाई हस्तियाँ जबरन की जाने वाली शादियों के ख़िलाफ़ एक ज़ोरदार अभियान शुरू करने जा रही हैं.

सरकार की फोर्स्ड मैरिज यूनिट यानी जबरन शादियों पर रोक की इकाई के इस अभियान में जानी-मानी हस्तियों में लेखिका-अभिनेत्री मीरा स्याल और अभिनेता अमि चन्ना भी शामिल हैं.

हर साल ब्रिटेन में एशियाई समुदाय से इस तरह की करीब 300 शिकायतें दर्ज की जाती हैं, सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जबरन शादी के ज़्यादातर मामलों में लड़के-लड़कियाँ औपचारिक शिकायत नहीं करते.

भारत और पाकिस्तान में माता-पिता की इच्छा से शादी परंपरागत रूप से होती रही है लेकिन कई बार लड़के-लड़की की मर्ज़ी के खिलाफ भी रिश्ता तय किया जाता है और उनके मना करने पर उन्हें शारिरिक और मानसिक रुप से भी प्रताड़ित किया जाता है.

ब्रितानी सरकार जबरन शादियों पर रोक लगाने के लिए नया कानून बनाने वाली थी लेकिन अब ऐसा नहीं करने का निर्णय लिया गया है.

 जबरन शादी घरेलू हिंसा का एक रुप हैं और मानवाधिकारों का हनन है. जिसमें पीड़ित व्यक्ति को मानसिक और शारिरिक यातना दी जाती है. हम युवा वर्ग को उनके अधिकार दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे
ब्रितानी गृह विभाग की मंत्री

इस अभियान के तहत जबरन शादियों के ख़िलाफ़ रेडियो-टीवी पर संदेश प्रसारित करने की योजना है जिसका उद्देश्य होगा युवा वर्ग को जागरुक करना कि वे इसके खिलाफ़ खड़े हों और अपनी शिकायत दर्ज कराएँ.

ये अभियान माता-पिता की इच्छा से हुई शादियों और जबरन शादियों के बीच फर्क को बताता है.

ब्रितानी गृह विभाग की मंत्री का कहना है कि ये परंपरा सिर्फ एशियाई समुदाय ही नहीं बल्कि मध्य-पूर्वी देशों, पश्चिमी बलकान और अफ्रीका के समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों में प्रचलित है.

उनका कहना हैं, “जबरन शादी घरेलू हिंसा का एक रुप हैं और मानवाधिकारों का हनन है. जिसमें पीड़ित व्यक्ति को मानसिक और शारिरिक यातना दी जाती है. हम युवा वर्ग को उनके अधिकार दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे.”

पिछले साल सरकार ने इस कानून के बारे में लोगों की सलाह लेने के लिए एक सर्वे चलाया जिसमें दिए गए जवाबों में ज़्यादातर लोगों का मानना था कि इस तरह का कानून बनाने की ज़रुरत नहीं.

फ़िलहाल जबरन शादी के मामलों में इल्ज़ाम में लोगों को अपहरण और बलात्कार के जुर्म में सज़ा हो सकती है.

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