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शनिवार, 04 जून, 2005 को 10:25 GMT तक के समाचार
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जादू-टोने के मामलों से चिंता
पिंटो और सीता किसंगा
इन दोनों सहित तीन लोगों को दोषी पाया गया
मानवीय कल्याण के लिए काम करने वाले कुछ ब्रितानी ग़ैरसरकारी संगठनों (चैरिटी) ने ब्रिटेन में रहने वाले मध्य अफ्रीका के सैकड़ों बच्चों को डायन या जादू-टोना करने वाला बताकर प्रताड़ना का शिकार होने की आशंका व्यक्त की है.

ऐसे ही एक मामले में चार साल की एक लड़की को प्रताड़ित करने के आरोप में तीन लोगों को दोषी पाया गया है.

लंदन के चार चैरिटी संगठनों ने बीबीसी से कहा कि यह सिर्फ़ अकेला मामला नहीं है और इस तरह के और भी मामलों की आशंका व्यक्त की है.

ये चैरिटी मध्य अफ्रीका के लोगों के साथ मिलकर काम कर रही हैं.

इन चैरिटी संगठनों ने यह भी अंदेशा ज़ाहिर किया है कि बहुत से बच्चों को दंड देने के इरादे से उनके देश वापस भेज दिया गया होगा.

एक मामले में दावा किया गया है कि अंगोला का एक बच्चा दो साल पहले वापस भेज दिया गया था और उसके बाद उसे मार दिया गया.

बीबीसी संवाददाता एंगुस क्रॉफ़र्ड का कहना है कि समाज कल्याण के लिए काम करने वाले लोगों का मानना है कि हो सकता है कि 'अलग-अलग चर्चों के बनने' से भी इस प्रताड़ना की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा हो.

इनमें से कुछ चर्च अफ्रीकी मान्यताओं और परंपराओं को प्रबल तरीके से मानते हैं.

चैरिटी के लिए काम करने वाले यह भी शिकायत करते हैं कि ब्रिटेन के अधिकारी इस मामले में अनभिज्ञ हैं और इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी है.

ख़ौफ़नाक

गत शुक्रवार को तीन लोगों को आठ साल की एक लड़की को प्रताड़ित करने के आरोप में दोषी पाया गया था. उस पर डायन होने का आरोप लगाया गया था.

अनाथ लड़की की पिटाई के घाव
शरीर पर लगे ज़ख़्मों पर मिर्च लगाई गई

आरोप हैं कि इस अनाथ लड़की के अंदर से डायन को भगाने के लिए उसे पीटा गया, उसके शरीर पर ज़ख़्म लगाकर उस पर मिर्च पाउडर छिड़का गया और उसकी आँखों में भी मिर्च डाली गईं.

इस लड़की की एक रिश्तेदार महिला को इस प्रताड़ना का दोषी पाया गया जबकि बाक़ी दो लोगों को उसकी मदद का दोषी क़रार दिया गया.

ये तीनों लंदन के रहने वाले हैं और उन्हें हत्या की साज़िश रचने का दोषी पाया गया.

उस अनाथ लड़की को 2002 में अंगोला से ब्रिटेन लाया गया था और उसे उसकी 38 वर्षीय एक रिश्तेदार महिला उसके माता-पिता की मौत के बाद लाई थी.

प्रताड़ना का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब 2003 में एक लड़के ने अपनी माँ से कहा कि वह अनाथ लड़की जादू-टोना करती है. और इस लड़के की बात को सही मान लिया गया.

बस उसके बाद उस लड़की के शरीर पर चाकू से गोंदा गया और उसे जूतों और चमड़े की बेल्ट से पीटा गया.

पुलिस पूछताछ के दौरान उस लड़की ने बताया कि उसकी रिश्तेदार महिला के एक सहयोगी ने एक बार उसे किचन में एक कोने में धकेलकर कहा था, "आज तू मरने वाली है."

उस लड़की ने अदालत में यह भी बताया गया कि उसे एक बार एक बोरे में बंद कर दिया गया था और वह डर गई थी कि शायद उसे नदी में फेंकने के लिए ले जाया जा रहा है.

एक चैरिटी संस्था एनएसपीसीसी की निदेशक मैरी मार्श ने इस घटना को दर्दनाक बताते हुए कहा, "इससे कुछ अफ्रीकी लोगों की आस्थाओं की पोल खुलती है जो बाल शोषण को बढ़ावा देते हैं."

लंदन की हैकनी काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पेनी थॉम्पसन का कहना था, "यह बहुत गंभीर मामला था और जो भी लोग बाल संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं उनके सामने एक चुनौती भी खड़ी करता है."

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