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सोमवार, 31 जुलाई, 2006 को 18:11 GMT तक के समाचार
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ईरान को मिली एक महीने की समयसीमा
ईरान
प्रस्ताव में परमाणु ठिकाने को पर्यवेक्षकों के लिए खोलने की भी बात है
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान को अपना यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम रोकने के लिए एक महीने का समय दिया है.

एक प्रस्ताव पारित करके सुरक्षा परिषद ने ईरान से कहा है अगर उसने ऐसा नहीं किया तो उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

ईरान के ख़िलाफ़ यह प्रस्ताव एक के मुक़ाबले 14 मतों से पारित हुआ. सिर्फ़ क़तर ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया तो 'ज़रूरी क़दम' उठाए जाएँगे.

लेकिन प्रस्ताव में तुरंत पाबंदी लगाने की चेतावनी नहीं दी गई है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत जवाद ज़ारिफ़ ने इस प्रस्ताव पर नाराज़गी जताते हुए इसे ख़ारिज कर दिया है.

ज़ारिफ़ ने कहा, "ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को कोई ख़तरा नहीं है. इसलिए इस मामले पर सुरक्षा परिषद में चर्चा की आवश्यकता नहीं थी."

अमरीका और कई अन्य देश ईरान पर ये आरोप लगाते रहे हैं कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है हालाँकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

पिछले दो सप्ताह से सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्य देश (अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन और रूस) और जर्मनी इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर रहे थे.

सहमति

इससे पहले 12 जुलाई को इस मामले पर सहमति हुई थी कि अगर ईरान यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम के बदले प्रस्तावित पैकेज पर कोई जवाब नहीं देता, तो मामला सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है.

प्रस्ताव के ख़िलाफ़ सिर्फ़ क़तर था

ईरान ने पहले कहा था कि वह इस पैकेज पर 22 अगस्त तक कोई जवाब दे देगा. लेकिन अब सुरक्षा परिषद में पारित प्रस्ताव के मुताबिक़ ईरान को 31 अगस्त तक अपना यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम रोकना होगा और अपने सभी परमाणु ठिकाने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के लिए खोलने होंगे.

प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर ईरान ने इसे नहीं स्वीकार किया तो संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अध्याय 7 के अनुच्छेद 41 के अंतर्गत ज़रूरी क़दम उठाए जाएँगे, जो आर्थिक प्रतिबंध से संबंधित है.

रूस और चीन ने 'प्रतिबंध' का उल्लेख करने के ख़िलाफ़ बहस की. इन दोनों देशों का कहना था कि अगर ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया, तो उस स्थिति में क्या क़दम उठाए जाएँगे- इस पर फिर से सुरक्षा परिषद में चर्चा होनी चाहिए.

लेकिन दोनों देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि ईरान इसे स्वीकार करे और दुनिया के सामने यह साबित करे कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उत्पादन के लिए है न कि परमाणु हथियार बनाने के लिए.

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