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लेबनान से जुड़े कुछ तथ्य | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान देखा जाए तो मध्यपूर्व में सबसे जटिल और बंटे हुए देशों में से एक है. इसराइल के निर्माण के समय जो भी विवाद उठे उनमें कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में लेबनान शामिल रहा है. लेबनान एक छोटा पर्वतीय राष्ट्र है और 1943 में अपनी आज़ादी से पहले तक फ़्रांस के आधीन रहा है. उसकी आबादी ईसाई, सुन्नी मुसलमानों, शिया मुसलमानों, द्रुज़ और अन्य तबक़ों का एक मिश्रण है और वह क्षेत्र के सताए हुए अल्पसंख्यकों के लिए एक शरणस्थल रहा है. सरकारी ढाँचा अलग-अलग गुटों में बंटा हुआ है. लेबनान में बड़े पैमाने पर फ़लस्तीनी शरणार्थी दाख़िल हुए हैं जिनमें से अधिकतर का क़ानूनी दर्जा सीमित रहा है. गृह युद्ध
वर्ष 1975 से नब्बे के दशक तक लेबनान ने एक ज़बरदस्त गृहयुद्ध देखा है जहाँ क्षेत्रीय ताक़तों, विशेषकर इसराइल, सीरिया और फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन ने लेबनान को अपने झगड़े सुलझाने के लिए लड़ाई के मैदान के तौर पर इस्तेमाल किया. युद्ध की शुरुआत होते ही सीरियाई सैनिक टुकड़ियाँ वहाँ दाख़िल हो गईं. इसराइली सेना ने 1978 और फिर 1982 में हमले किए और फिर वे 1985 में एक स्वघोषित सुरक्षा ज़ोन में दाख़िल हो गए जहाँ से वे मई 2000 में बाहर निकले. सीरिया का लेबनान में अच्छा ख़ासा राजनीतिक दबदबा है. हालाँकि दमिश्क़ ने 2005 में अपनी सैनिक टुकड़ियाँ वहाँ से हटा कर 29 साल की अपनी सैन्य मौजूदगी ख़त्म कर दी. यह क़दम लेबनान के प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी की हत्या के बाद उठाया गया. लेबनानी विपक्षी गुटों ने इस मामले में सीरिया का हाथ होने का आरोप लगाया जिससे सीरिया ने लगातार इंकार किया. बेरुत में बड़ी-बड़ी सीरिया समर्थक और सीरिया विरोधी रैलियाँ आयोजित हुईं जिससे सरकार के पतन में तेज़ी आई और सीरिया को वहाँ से बाहर निकलना पड़ा. संयुक्त राष्ट्र ने लेबनान से सभी सशस्त्र गुटों को बाहर निकालने की मांग की थी जिनमें फ़लस्तीनी विद्रोही गुट और शिया मुसलमानों के शक्तिशाली गुट हिज़्बुल्लाह की सैन्य इकाई भी शामिल थे. लेबनान की साक्षरता दर काफ़ी ऊँची है और पारंपरिक रूप से वह व्यापार के लिए जाना जाता है. उसे मध्यूपर्व में व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र कहा जा सकता है. तथ्य आबादी 38 लाख |
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