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'वो मेरी ज़िंदगी का प्यार था' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सात जुलाई 2005 के धमाकों के बाद के दिनों में मैरी फटाई विलियम्स ने हिंसा का अंत करने की अपील की थी. विलियम्स भी एक ऐसी माँ हैं जिनका बेटा उन धमाकों का शिकार हुआ था. उन धमाकों का एक साल पूरा होने पर मैरी जब अपने बेटे के बारे में बात करती नज़र आईं तो भावुकता के साथ-साथ हिम्मत से भी भरी हुई थीं. मैरी जब भी अपने बेटे के बारे में बात करती हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है. यह मुस्कान दर्द भरी हुई नहीं बल्कि उसमें गर्मजोशी और हौसला होता है. मैरी की आवाज़ से ऐसा लगता है कि जैसे उनका बेटा अब भी जीवित है. मैरी अपने बेटे की मौत का असर बयान करते हुए कहती हैं, "अब ऐसा लगता है कि जब घर का दरवाज़ा खुलता है तो यह यक़ीन करना मुश्किल होता है कि एंटोनी नहीं है. यह कि एंटोनी अब मुझे गर्मजोशी के साथ गले नहीं लगाएगा." "यह भी कि अब वह कभी मुझसे टेलीफ़ोन पर बातचीत नहीं करेगा और मैं अब सिर्फ़ तस्वीर के ज़रिए अपने बेटे से बात कर सकती हूँ."
मैरी कहती हैं, "लेकिन अब भी अक्सर लगता है कि जैसे वो मुझे मम्मी कहकर पुकार रहा है, जैसे कह रहा हो, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ. क्या तुम्हें मेरा साथ महसूस नहीं हो रहा है." मैरी अपने बेटे एंटोनी के बारे में बात करते नहीं थकतीं, "वो मेरी ज़िंदगी का प्यार और जोश था. वो तब पैदा हुआ था जब मैं 24 साल की थी और वह ख़ुद भी प्यार और हौसले से भरपूर था." मैरी यह स्वीकार करने में दिक्कत महसूस करती हैं कि ब्रिटिश सरकार सात जुलाई के धमाकों की व्यापक सार्वजनिक जाँच कराने से क्यों इनकार कर रही है, "सार्वजनिक जाँच ज़रूर होनी चाहिए. मैंने मेरा बेटा खोया है. अन्य लोगों ने भी अपने प्रियजन खोए हैं." मैरी कहती हैं, "आप हमें सिर्फ़ भूल जाने के लिए नहीं कह सकते... भूल जाओ और आगे बढ़ो... एक सभ्य समाज में यह स्वीकार्य नहीं हो सकता. अगर आप कुछ छिपाना नहीं चाहते हैं तो उसे दूसरों को भी देखने दो." एंटोनी के पिता डॉक्टर एलन फटाई विलियम्स भी मैरी के इस दर्द में साथी हैं. एक मुस्लिम होने के नाते वह हसीब हुसैन की कार्रवाई से आहत हैं जिसने कथित तौर पर टेविस्टॉक चौराहे पर बस में धमाका किया था. वह कहते हैं, "इस्लाम शांति का पैग़ाम देने वाला मज़हब है. जो लोग ऐसा करते हैं वे सही राह से भटके हुए हैं और अफ़सोस की बात ये है कि उन्हें ऐसे मुस्लिम गुमराह करते हैं जो ख़ुद हिंसा का सबक देते हैं. यह इस्लाम की सीख नहीं है." | इससे जुड़ी ख़बरें 'हमलों के मुद्दे पर बंटे हैं ब्रितानी मुस्लिम'04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना क्या है सच्चाई पाकिस्तानी मदरसों की?05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी मुसलमानों में चिंता की लहर13 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदनः कब क्या हुआ22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना हमलावरों की ज़ोर-शोर से तलाश22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी पुलिस नीति नहीं बदलेगी25 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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