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ग़ज़ा पट्टी में तनाव विषाक्त | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य पूर्व की वर्ष 2005 की संभवत सबसे महत्वपूर्ण घटना थी चार दशक के क़ब्ज़े के बाद ग़ज़ा से इसराइल की वापसी. इसके बाद कुछ-कुछ उम्मीद बँधने लगी थी कि मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. अब एक बार फिर इसराइलियों में यह धारणा घर करने लगी है कि शांति और सुरक्षा के बदले ज़मीन के समझौते की बात करना बेकार है. इसी तरह फ़लस्तीनियों ने एक ऐसी पार्टी को सरकार बनाने के लिए चुना जो इसराइल के विनाश की क़सम खाकर हथियारबंद अभियान चला रही हो. हमास के सत्ता में आने के बाद से स्थिति गड़बड़ाती दिख रही है. ग़ज़ा में हिंसा और अव्यवस्था का बोलबाला रहा है और फ़लस्तीनी गुटों के बीच सत्ता का संघर्ष जारी है. इसराइल ने कई बार फ़लस्तीनी इलाक़ों पर हमले किए हैं जिनमें कम से कम 12 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं. हमास के सत्ता में आने के बाद से लगी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक पाबंदियों की वजह से आम लोगों का जीवन वैसे ही और कठिन हो गया है. गज़ा और पश्चिमी तट में कड़वाहट एक बार फिर बढ़ रही है, रविवार को जब फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने इसराइली सैनिक चौकी पर हमला किया और एक सैनिक को बंधक बना लिया तो फ़लस्तीनियों ने इस पर अपनी ख़ुशी प्रकट की. और अब जिस तरह से इसराइली सेना ग़ज़ा में घुसी है उसका कम से एक परिणाम तो तय है, इससे ग़ज़ा में माहौल और विषाक्त ही होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें हवाई हमले के बाद, ज़मीनी कार्रवाई भी27 जून, 2006 | पहला पन्ना 'शर्त पूरी नहीं होती तो सैनिक बंदी रहेगा'27 जून, 2006 | पहला पन्ना कूटनीति को एक मौक़ा देने की अपील27 जून, 2006 | पहला पन्ना इसराइल को परोक्ष तौर पर मान्यता27 जून, 2006 | पहला पन्ना क़ैदियों की रिहाई से ओल्मर्ट का इनकार26 जून, 2006 | पहला पन्ना सूचना के बदले चरमपंथी गुटों की मांग26 जून, 2006 | पहला पन्ना गज़ा सीमा चौकी के पास गोलाबारी25 जून, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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