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इसराइल को परोक्ष तौर पर मान्यता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़ज़ा से मिल रही ख़बरों के अनुसार फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने उस दस्तावेज़ पर अपनी सहमति दे दी है जिसमें द्विराष्ट्र सिद्धांत, यानि इसराइल और फ़लस्तीनी राष्ट्र के सहअस्तित्व, को मान्यता दी गई है. अभी तक प्रतिद्वंद्वी फ़लस्तीनी घटकों फ़तह और हमास में इसराइल को मान्यता देने के नाम पर सहमति नहीं थी. इसराइल की जेलों में बंद वरिष्ठ फ़लस्तीनी नेताओं द्वारा तैयार दस्तावेज़ पर दोनों फ़लस्तीनी गुटों के बीच कई हफ़्तों से बातचीत चल रही थी. इससे पहले फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने धमकी दी थी कि हमास ने दस्तावेज़ पर अपनी सहमति नहीं दी तो वह इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने को बाध्य हो जाएँगे. सहमति समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार हमास प्रवक्ता समी अबू ज़ुहरी ने मंगलवार को कहा, "हम क़ैदियों के प्रस्ताव के सभी बिंदुओं पर सहमत हैं." जनवरी में हुए चुनाव के बाद फ़लस्तीनी प्रशासन पर नियंत्रण करने वाले हमास ने कभी भी इसराइल को मान्यता नहीं दी है, इसलिए दस्तावेज़ पर वह सहमति नहीं दे रहा था. हमास का हमेशा यही रुख़ रहा है कि इसराइल का निर्माण फ़लस्तीनियों से छीनी गई ज़मीन पर किया गया है. इतना ही नहीं हमास ने हमेशा इसराइल के विध्वंस की बात की है. दूसरी ओर इसराइल ने पहले ही स्पष्ट कर रखा है कि प्रतिद्वंद्वी फ़लस्तीनी गुटों में होने वाली किसी तरह की सहमति का उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें अब्बास, हानिया की ग़ज़ा में बातचीत 24 जून, 2006 | पहला पन्ना हमास की संघर्षविराम की ताज़ा पेशकश15 जून, 2006 | पहला पन्ना 'जनमत-संग्रह का कोई मतलब नहीं'10 जून, 2006 | पहला पन्ना जनमत संग्रह कराया ही जाएगा: अब्बास10 जून, 2006 | पहला पन्ना अब्बास ने हमास को समय दिया05 जून, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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