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शनिवार, 17 जून, 2006 को 16:00 GMT तक के समाचार
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मदद योजना पर फ़लस्तीनी एकमत
फ़लस्तीनी शरणार्थी
कुछ फ़लस्तीनियों को तुरंत सहायता चाहिए
फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि फ़लस्तीनियों की वित्तीय मदद के यूरोपीय संघ ने जो प्रस्ताव रखा है वह काफ़ी नहीं है.

अब्बास ने कहा है कि हालाँकि यह एक महत्वपूर्ण क़दम है लेकिन इसे तब तक स्वीकार नहीं किया जा सकता जब तक कि इस धनराशि को फ़लस्तीनी सरकार के माध्यम से उपलब्ध नहीं कराया जाता है.

उधर यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी देश ऐसा करने से इनकार कर रहे हैं क्योंकि फ़लस्तीनी सरकार में हमास का बहुमत है और उसने जनवरी 2006 में हुए आम चुनाव के बाद मार्च में सरकार बनाई थी.

यूरोपीय संघ और अमरीका का कहना है कि यह सहायता राशि मानवीय संकट पैदा होने से रोकने के लिए देने का प्रस्ताव है.

लाखों डॉलर की इस योजना में पेशकश की गई है कि एक लाख से ज़्यादा फ़लस्तीनियों को सीधे सहायता पहुँचाई जाएगी.

यूरोपीय संघ अपनी इस योजना के लिए अमरीका, रूस और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन भी हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि उनका देश इस बारे में सहमति के काफ़ी नज़दीक है.

अमरीका इस योजना के लिए कोई राशि नहीं दे रहा है, हालाँकि उसने कुछ वित्तीय सहायता की पेशकश की है.

उधर फ़लस्तीनी विदेश मंत्री महमूद अज़हर ने हमास के नेतृत्व वाली सरकार को नज़रअंदाज़ करके फ़लस्तीनी लोगों को सीधे सहायता पहुँचाने की यूरोपीय संघ की योजना की आलोचना की है.

अज़हर ने कहा कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को नज़रअंदाज़ करना एक तरह से फ़लस्तीनी लोगों महत्वहीन बनाना है.

उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व और एशिया के अनेक देशों ने फ़लस्तीनियों की मदद के लिए लाखों डॉलर या दान कर दिए हैं या दान करने का वादा किया है.

महमूद अज़हर ने बताया कि पाँच करोड़ डॉलर ईरान ने दिए हैं, तीस लाख डॉलर पाकिस्तान से आए हैं और लीबिया, इंडोनेशिया और मलेशिया ने भी लाखों डॉलर की मदद करने का वादा किया है.

फ़लस्तीनी सूचनामंत्री यूसुफ़ रिज़का ने भी शुक्रवार को कहा था कि अगर लाखों डॉलर की यह राशि सीधे इसी तरह जारी की जाती है तो इससे सरकार, लोगों और राष्ट्रपति महमूद अब्बास के बीच खाई पैदा हो जाएगी.

ग़ौरतलब है कि महमूद अब्बास फ़तह संगठन का नेतृत्व करते हैं और फ़लस्तीनी प्रशासन में सरकार हमास की है.

यूरोपीय देश और अमरीका हमास को चरमपंथी संगठन मानते हैं.

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