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शुक्रवार, 19 मई, 2006 को 13:45 GMT तक के समाचार
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फ़लस्तीनी प्रशासन और हमास
सामी अबू ज़ूहरी
हमास अधिकारी मिस्र के ज़रिए ग़ज़ा पट्टी में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे
फ़लस्तीनी सीमा अधिकारियों ने हमास प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी से 8 लाख डॉलर ज़ब्त किये थे लेकिन अब यह धन गृह मंत्रालय को सौंप दिया गया है.

यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों का कहना है कि सामी अबू ज़ुहरी इस धन को लेकर मिस्र से लगी ग़ज़ा पट्टी की सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे.

उधर हमास के बंदूकधारी भी सीमा के पास पहुंच गए थे और तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी लेकिन मामला सुलझा लिया गया.

अमरीका की विदेश मंत्री कॉंडोलीसा राइस ने हमास प्रशासन और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति के बलों के बीच इस प्रतिद्वंद्विता पर चिंता व्यक्त की है.

बीबीसी के टीकाकार निक चाइल्ड्स और रॉजर हार्डी ने इस स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा है कि हमास की सरकार और प्रधानमंत्री के पद पर एहुद ओलमर्ट, इसराइली-फ़लस्तीनी संघर्ष में केवल ये दो नए चरित्र आ गए हों, ऐसा नहीं है.

इस संघर्ष की रूपरेखा ऐसी दिशाओं में प्रवेश कर रही है जिसका अनुमान लगाना बहुत कठिन है.

किस दिशा में?

जब हमास की सरकार बनी थी तो अमरीका की पहली प्रतिक्रिया थी कि यदि अंतराष्ट्रीय आर्थिक मदद पर रोक लगा दी जाए तो ये सरकार तुरंत धराशाई हो जाएगी.

लेकिन अपने यूरोपीय सहयोगियों की सलाह पर अमरीका को पैंतरा बदलना पड़ा.

यूरोपीय देशों का कहना था कि पैसा रोकने का सीधा असर लोगों पर पड़ेगा एक मानवीय त्रासदी पैदा हो सकती है. साथ ही फ़लस्तीनी प्राधिकरण कमजो़र हो सकता है.

लेकिन यूरोप और अमरीका दोनों ही एक बात पर ज़रूर सहमत हैं कि फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के हाथ मज़बूत किए जाएँ क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि महमूद अब्बास इसराइल के साथ शांति वार्ता शुरू करवाने के साथ-साथ हमास के पर कतरने में भी सहायक हो सकते हैं.

इसके लिए वो न केवल महमूद अब्बास को कूटनीतिक मदद दे रहे हैं बल्कि उनके नियंत्रण वाली विशिष्ट सेना को भी मज़बूत कर रहे हैं.

शुक्रवार को जिस तरह से इस सेना और हमास के नियंत्रण वाले सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई उससे ये मामला और जटिल ही होता दिखाई दिया.

अमरीकी विदेश मंत्रि कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि फ़लस्तीनी क्षेत्र में एक और सुरक्षा बल को होना एक ख़तरनाक स्थिति पैदा कर सकता है.

उन्होंने उम्मीद जताई है कि फ़लस्तीनी नेतृत्व ये मामला सुलझा लेगा. लेकिन यहां सवाल ये भी उठता है कि उम्मीद जताने के अलावा अमरीका क्या कुछ कर भी सकता है.

अमरीका की अबतक यही नीति रही है कि फ़लस्तीनी सुरक्षा बलों को मज़बूत किया जाए क्योंकि इससे इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच कूटनीति को और मदद मिलेगी.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि चाहे आर्थिक मदद रोकने की बात हो या फिर सुरक्षा का मामला हो, हमास को अलग-थलग करने की नीति अंदरूनी तनाव को और बढ़ा ही रही है.

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