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'ग्वांतानामो' बंद करने को तैयार बुश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वो खुशी खुशी ग्वांतानामो बे यातना शिविर बंद करने को तैयार हैं लेकिन उन्हें इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का इंतज़ार है. बुश ने कहा कि वो चाहते हैं कि ग्वांतानामो बे में रखे गए क़ैदियों के ख़िलाफ मामला चले लेकिन इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट को फ़ैसला करना है कि इन क़ैदियों के ख़िलाफ सैन्य ट्राइब्यूनल में मामला चलेगा या सामान्य अदालतों में. जर्मन टेलीविज़न को दिए एक साक्षात्कार में बुश ने कहा कि ग्वांतानामो बे का मसला जटिल और पेचीदा है. इस यातना शिविर में दुनिया के कई देशों के पांच सौ से अधिक लोग आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के शक के आरोप में बंद हैं. इस यातना शिविर में रखे गए क़ैदियों की हालत को लेकर पूरी दुनिया में बुश सरकार की आलोचना हो रही है. इसके अलावा इन क़ैदियों को लंबे समय वहां रखे जाने और सैन्य ट्राइब्यूनलों द्वारा सुनवाई को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना हो रही है. इस समय अमरीका की सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रही है कि ग्वांतानामो बे क़ैदियों के ख़िलाफ आम अदालतों में या सैन्य ट्राइब्यूनलों में मामला चलाया जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें ग्वांतानामो बंद करोः संयुक्त राष्ट्र अधिकारी16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना अन्नान ने की शिविर बंद करने की माँग17 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो बे क़ैदियों के नाम जारी03 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो के एक बंदी की दास्तान03 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो के क़ैदियों के नाम सार्वजनिक20 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना प्रताड़ना पर अमरीका से सवाल-जवाब05 मई, 2006 | पहला पन्ना पाँच क़ैदी ग्वांतानामो से रिहा06 मई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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